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Bridge Collapse: 100 लोगों की क्षमता वाले पुल पर कैसे पहुंच गए 400 से ज्यादा लोग?, ओरेवा ग्रुप पर उठ रहे सवाल

Mon, 31 Oct 2022 11:54 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरबी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरबी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 31 Oct 2022 11:54 AM IST
सार

दीवाली के एक दिन बाद ही इस पुल को मरम्मत के बाद जनता के लिए खोला गया था। इस पुल की मरम्मत में दो करोड़ रुपये की लागत की बात भी सामने आ रही है। वहीं, अब इतना बड़ा हादसा हो जाने के बाद पुल की मरम्मत करा रही  और पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही ओरेवा कंपनी की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। 

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Suspension Bridge Collapse: Questions are being raised on Orva Group which maintains Morbi bridge
मोरबी पुल हादसा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात में रविवार शाम हुए मोरबी पुल हादसे में अब तक 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। कई लोग इस समय अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं। मौके पर लगाचार राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है। जितने बड़े स्तर पर यह हादसा हुआ है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। बता दें कि दीवाली के एक दिन बाद ही इस पुल को मरम्मत के बाद जनता के लिए खोला गया था। इस पुल की मरम्मत में दो करोड़ रुपये की लागत की बात भी सामने आ रही है। मरम्मत के बाद खोले जाने के पांच दिन के भीतर ही इतना बड़ा हादसा हो जाने के बाद पुल की मरम्मत करा रही  और पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही ओरेवा कंपनी की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। 

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 इस कंपनी के पास है रखरखाव की जिम्मेदारी
बता दें कि मोरबी पर बने इस अंग्रेजों के जमाने के ब्रिज के रखरखाव की जिम्मेदारी वर्तमान में ओधवजी पटेल के स्वामित्व वाले ओरेवा ग्रुप के पास है। दरअसल, पहले इस पुल का पूरा रख रखाव नगर निगम के पास था। बाद में इसके लिए एक ट्रस्ट बनाया गया। इसी ट्रस्ट ने कुछ समय पहले टेंडर के माध्यम से इसके पुनर्निर्माण और रख रखाव के ठेके को लेकर ओरेवा कंपनी के साथ समझौता हुआ था। जिसके बाद इस ग्रुप ने मार्च 2022 से मार्च 2037 यानी 15 साल के लिए इस पुल के रखरखाव, सफाई, सुरक्षा और टोल वसूलने जैसी सारी जिम्मेदारी ले ली थी। 
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 पुल की क्षमता 100 लोगों की 
 मिली जानकारी के मुताबिक, इस पुल की क्षमता करीब 100 लोगों की ही है। वहीं, इस पुल पर आने के लिए करीब 15 रुपये की फीस भी लगती है। ऐसे में कहा जा रहा है कि दिवाली के बाद वाले वीकेंड पर कमाई के लालच में इस पुल को बिना फिटनेस जांच के ही खोल दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि घटना के वक्त करीब 400 से 500 लोग पुल पर थे। ऐसे में भारी भीड़ का बोझ पुल सह नहीं पाया और टूट गया। 
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मरम्मत के बाद नगरपालिका ने नहीं जारी किया था फिटनेस प्रमाण पत्र
इस सस्पेंशन ब्रिज को एक निजी फर्म द्वारा सात महीने के मरम्मत कार्य के बाद दीवाली के अगले दिन जनता के लिए फिर से खोल दिया गया था। मोरबी नगर पालिका के अधिकारी ने संदीपसिंह जाला ने बताया कि नवीकरण कार्य पूरा होने के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया गया था, लेकिन स्थानीय नगरपालिका ने अभी तक (नवीनीकरण कार्य के बाद) कोई फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था। 

खड़े हो रहे कई सवाल
इस हादसे में इतने लोगों की जान जाने के बाद सामने आ रही लापरवाहियों के बाद ओरेवा कंपनी और स्थानीय प्रशासन की भूमिका कटघरे में प्रतीत होती है। इन लापरवाहियों को देखते हुए ये बड़ा सवाल है कि अगर पुल की अधिकतम क्षमता 100 लोगों की है तो रविवार को हादसे के समय  मोरबी के पुल पर 400 से अधिक लोग कैसे पहुंच गए? साथ ही जब स्थानीय नगर पालिका ने मरम्मत के बाद कोई फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था तो किसके आदेश से पुल को दोबारा खोल दिया गया? 

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