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सरोगेट बच्ची की मदद के लिए विदेश मंत्री ने किया ट्वीट, पूछे 'कड़े' सवाल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Sep 2016 09:11 AM IST
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सुषमा स्वराज
- फोटो : PTI
भारत में सरोगेसी के नए कानून आने के बाद एक अलग मामला सामने आया है। क्रिस और मिशेल न्यूमैन नाम के दंपति मेडिकल वीजा लेकर मुंबई आए थे, यहां उन्होंने सरोगेसी के जरिए एक बच्ची के मां-बाप बनने की कोशिश की। लेकिन उन्हें अब तक बच्ची के लिए ब्रिटिश पासपोर्ट हासिल नहीं हुआ है, ऐसे में दंपति के पास उसे अपने साथ ब्रिटेन ले जाना संभव नहीं है।
दंपति ने ट्वीट कर यह मामला उठाया तो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया, साथ ही केंद्र के हाल में लाए गए कड़े सरोगेसी बिल की आलोचना करने वालों से जवाब भी मांगा। विदेश मंत्री ने मेडिकल वीजा बढ़ाने का आश्वासन भी दिया
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दंपति ने ट्वीट कर यह मामला उठाया तो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया, साथ ही केंद्र के हाल में लाए गए कड़े सरोगेसी बिल की आलोचना करने वालों से जवाब भी मांगा। विदेश मंत्री ने मेडिकल वीजा बढ़ाने का आश्वासन भी दिया
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Will the advocates of commercial surrogacy suggest a solution and help this Baby ? Pl RThttps://t.co/OCVyNSSs4Y
विज्ञापन विज्ञापन— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) September 13, 2016
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सरोगेट बच्चे के भाग्य में अनाथालय?
सरोगेसी
ब्रिटिश दंपति की समस्या के बारे में बताते हुए स्वराज ने ट्वीट किया कि क्या किसी सरोगेट बच्चे के भाग्य में अनाथालय लिखा होना चाहिए? विदेश मंत्री एक अन्य ट्वीट में लिखा कि कमर्शियल सरोगेसी का समर्थन करने वाले इस मामले का कोई हल बता सकते हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कमर्शियल सरोगेसी पर पाबंदी लागू करने का फैसला करते हुए तय किया था कि सिर्फ नजदीकी रिश्तेदार ही सरोगेट के रूप में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
पिछले महीने सरोगेसी बिल को केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। इस विधेयक में सरोगेसी यानी किराये की कोख वाली मां के अधिकारों की रक्षा तथा इस तरह के बच्चों के अभिभावकों को कानूनी मान्यता देने का प्रावधान है। सरोगेसी बिल के तहत व्यावसायिक सरोगेसी नहीं की जा सकती सिर्फ जरूरतमंद बांझ दंपतियों के लिए नैतिक रूप से सरोगेट मां बनने की अनुमति दी गई है।
पिछले महीने सरोगेसी बिल को केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। इस विधेयक में सरोगेसी यानी किराये की कोख वाली मां के अधिकारों की रक्षा तथा इस तरह के बच्चों के अभिभावकों को कानूनी मान्यता देने का प्रावधान है। सरोगेसी बिल के तहत व्यावसायिक सरोगेसी नहीं की जा सकती सिर्फ जरूरतमंद बांझ दंपतियों के लिए नैतिक रूप से सरोगेट मां बनने की अनुमति दी गई है।