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चाबहार बंदरगाह के उद्घाटन से पहले ईरान पहुंचीं सुषमा
एजेंसी / नई दिल्ली
Updated Sun, 03 Dec 2017 06:36 AM IST
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सुषमा स्वराज
- फोटो : SELF
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शनिवार को बिना किसी पूर्व घोषणा के रूस से लौटते समय तेहरान पहुंचीं। सुषमा चाबहार बंदरगाह के उद्घाटन से ठीक पहले पहुंची हैं। ईरान के राष्ट्रपति रविवार को चाबहार बंदरगाह का उद्घाटन करेंगे।
पढ़ें- सऊदी अरब में फंसा यवुक, विदेश मंत्री सुषमा से लगाई मदद की गुहार
सुषमा ने यहां अपने ईरानी समकक्ष जावेद जरीफ के साथ लंच पर बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा की। स्वराज रूस के सोची शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेकर लौट रहीं थीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट में बताया, ‘अपने पारंपरिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ईरान के विदेश मंत्री डॉ. जावेद जरीफ के साथ तेहरान में लंच पर बैठक की। दोनों पक्षों ने आपसी हितों के मुद्दे पर विचार विमर्श किया।’ समझा जाता है कि द्विपक्षीय संबंधों के अतिरिक्त दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिति और राजनीतिक घटनाक्रम पर भी चर्चा की। सुषमा के ईरान में ठहराव पर विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि यह कोई अनिर्धारित नहीं बल्कि तकनीकी ठहराव था।
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नए रणनीतिक रूट की होगी शुरुआत
इस बंदरगाह के चालू होने से भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच नए रणनीतिक रूट की शुरुआत होगी। इसमें पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं होगी। मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति रुहानी भारत की विदेश मंत्री की मौजूदगी में इस बंदरगाह का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले दोनों सुषमा और जरीफ ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को लागू करने की समीक्षा की। इस परियोजना में भारत महत्वपूर्ण सहयोगी है। एक महीने पहले ही भारत ने अफगानिस्तान को चाबहार बंदरगाह के जरिये गेहूं भेजा था।
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सुषमा ने यहां अपने ईरानी समकक्ष जावेद जरीफ के साथ लंच पर बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा की। स्वराज रूस के सोची शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेकर लौट रहीं थीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट में बताया, ‘अपने पारंपरिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ईरान के विदेश मंत्री डॉ. जावेद जरीफ के साथ तेहरान में लंच पर बैठक की। दोनों पक्षों ने आपसी हितों के मुद्दे पर विचार विमर्श किया।’ समझा जाता है कि द्विपक्षीय संबंधों के अतिरिक्त दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिति और राजनीतिक घटनाक्रम पर भी चर्चा की। सुषमा के ईरान में ठहराव पर विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि यह कोई अनिर्धारित नहीं बल्कि तकनीकी ठहराव था।
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नए रणनीतिक रूट की होगी शुरुआत
इस बंदरगाह के चालू होने से भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच नए रणनीतिक रूट की शुरुआत होगी। इसमें पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं होगी। मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति रुहानी भारत की विदेश मंत्री की मौजूदगी में इस बंदरगाह का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले दोनों सुषमा और जरीफ ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को लागू करने की समीक्षा की। इस परियोजना में भारत महत्वपूर्ण सहयोगी है। एक महीने पहले ही भारत ने अफगानिस्तान को चाबहार बंदरगाह के जरिये गेहूं भेजा था।