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सुनवाई में देरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों के लंबे समय से लंबित रहने से सुप्रीम कोर्ट चिंतित
Fri, 01 Oct 2021 10:16 PM IST
Amit Mandal
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 01 Oct 2021 10:16 PM IST
सार
अपनी पत्नी को जलाकर मार डालने के आरोप में उम्रकैद काट रहे व्यक्ति को जमानत प्रदान करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में मामला लंबित रहने पर चिंता जताई ।
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अदालत का फैसला
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों के लंबे समय से लंबित रहने को लेकर चिंता जताई। साथ ही कोर्ट ने अपनी पत्नी को जलाकर मार डालने के आरोप में उम्रकैद काट रहे व्यक्ति को जमानत प्रदान कर दी। कोर्ट ने उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष अपनी सजा के खिलाफ 2016 की उसकी अपील के इतने लंबे समय से लंबित रहने के आधार पर जमानत दी।
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चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को नाराजगी जताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के गृहसचिव को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था और कहा था कि वह बताएं कि दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपनी याचिका पर कितनी बार स्थगन मांगा। इतना ही नहीं पीठ ने कहा था कि ऐसा न होने पर उन्हें शुक्रवार को पीठ के समक्ष पेश होना पड़ेगा। प्रदेश सरकार के वकील ने देरी के लिए दोषी को जिम्मेदार ठहराया था। पीठ में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल हैं।
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पीठ ने शुक्रवार को प्रदेश सरकार द्वारा दायर हलफनामा पर विचार किया। प्रदेश सरकार की वकील गरिमा प्रसाद ने पीठ को बताया कि दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष कई बार मामले पर स्थगन लिया। हालांकि दोषी के वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि सजा को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता की याचिका के लिए हाईकोर्ट में अपील रिकॉर्ड तक तैयार नहीं किए गए। इस पर पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों के लंबे समय से लंबित रहने के बारे में हमें पता है। कोई प्रभावी सुनवाई न होने के कारण, हम याचिका का निपटारा कर रहे हैं और याचिकाकर्ता को जमानत प्रदान कर रहे हैं।
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