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ब्याज पर ब्याज माफी: कर्जदार संतुष्ट तो एमएसएमई व बिजली क्षेत्र ने मांगी राहत
Fri, 06 Nov 2020 03:29 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 06 Nov 2020 03:29 AM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार की ब्याज पर ब्याज माफी योजना को लेकर व्यक्तिगत कर्जदारों ने संतुष्टि जताई तो वहीं एमएसएमई और बिजली सेक्टर ने राहत की गुहार लगाई है। शीर्ष कोर्ट ने अब इस मामले पर सुनाई 18 नवंबर तक टाल दी है।
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मालूम हो कि सरकार ने दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज न वसूलने की योजना पेश की है। जिसके तहत चक्रवृद्धि व सामान्य ब्याज का अंतर कर्जदारों को लौटाया जाना शुरू हो गया है।
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जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह की पीठ के समक्ष मुख्य याचिकाकर्ता गजेंद्र शर्मा के वकील राजीव दत्ता ने कहा, वह कर्जदारों की पीड़ा समझने के लिए केंद्र व आरबीआई के बेहद आभारी हैं।
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उन्होंने कहा, व्यक्तिगत कर्जदार पांच नवंबर तक सरकार की पे-बैक योजना से संतुष्ट हैं। उन्होंने आरबीआई के हलफनामे के मद्देनजर अदालत से अपनी याचिका का निपटारा करने का आग्रह किया।
इस दौरान पीठ को बताया गया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दूसरी अदालत में सेंट्रल विस्टा मामले में बहस कर रहे हैं। वहीं वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से बिजली उत्पादकों को राहत देने की अपील की। आरबीआई के वकील वी गिरी ने लोन को एनपीए घोषित करने पर लगी रोक को हटाने की गुहार लगाई।
गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि केंद्र सरकार एक योजना लेकर आई है जिसके तहत कोविड-19 के मद्देनजर छह महीने (मार्च से अगस्त) की मोरेटोरियम अवधि में कर्जदारों से वसूले गए चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के बीच के अंतर की अनुग्रह राशि लौटाई जाएगी। यह अनुग्रह राशि कर्जदारों के ऋण खातों में जमा होंगे।