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एससी व एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देना सरकार का संवैधानिक दायित्व नहीं: कोर्ट

Sat, 12 Mar 2016 09:00 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 12 Mar 2016 09:00 AM IST
सार

  • सरकारों का संवैधानिक हक नहीं
  • सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार
  • पदोन्नति में आरक्षण देने का मामला
  • मायावती ने की थी शुरुआत

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Supreme court will not interfere in demotion case of SC/ST
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Getty Images

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति को प्रमोशन में आरक्षण देना सरकार का संवैधानिक दायित्व नहीं है। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारियों की पदावनति पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार करते हुए अपने आदेश में फेरबदल करने से मना कर दिया।

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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जिन अधिकारियों को प्रमोशन में आरक्षण नीति का लाभ मिल चुका है, उन्हें डिमोट न किया जाए। याचिका में कहा गया था कि सरकार को यह निर्देश दिया जाए कि वह कमेटी बनाकर नौकरी पेशा एससी एवं एसटी लोगों का डाटा इकट्ठा करें और प्रमोशन में आरक्षण दें।
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कमेटी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में गठित की जाए। लेकिन पीठ ने इसे मानने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि ऐसा करना विधायिका के काम में दखल है। पीठ ने कहा कि कुछ मामलों जैसे महिलाओं, बच्चों और कैदियों के अधिकारों को लेकर सरकार को दिशानिर्देश बनाने के लिए कहा गया है या अदालत ने खुद बनाए हैं, लेकिन ये सब दूसरी श्रेणी के तहत आते हैं।

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मायावती सरकार ने किया था बदलाव

Supreme court will not interfere in demotion case of SC/ST
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Getty Images
पीठ ने कहा कि एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही इसका आधार होगा। पीठ ने साफ किया फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई मतलब नहीं है। याचिका में कहा गया था कि यूपी सरकार ने बिना किसी सर्वेक्षण के हजारों लोगों को डिमोट कर दिया था। मालूम हो कि वर्ष 2007 में यूपी सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को पदोन्नति में आरक्षण देने का निर्णय लिया था।

सरकार के इस फैसले को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में यूपी सरकार  की अधिसूचना को निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि जिन लोगों को वर्ष 2007 की अधिसूचना के तहत पदोन्नति दी गई थी, उन्हें डिमोट किया जाए। इस मामले में यूपी सरकार पर अवमानना की कार्रवाई का खतरा भी था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने से इनकार कर दिया था।

उत्तर प्रदेश ने पीठ को बताया कि 20807 लोगों की पहचान की गई है जिन्हें डिमोट किया जाना है। गत वर्ष अक्तूबर में यूपी पुलिस ने बताया कि करीब 15226 लोगों को डिमोट कर दिया गया है। सरकार ने यह भी बताया था कि 5581 ऐसे हैं, जिनकी या तो मृत्यु हो गई है या वे सेवानिवृत्त हो गए हैं या जिन्हें निलंबित कर दिया गया है। साथ ही इसमें कई अधिकारियों का तबादला उत्तराखंड में हो गया है।
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