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Supreme Court: जजों की नियुक्ति में देरी संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई आज, SC ने बताया था बेहद गंभीर मामला

Mon, 13 Feb 2023 04:56 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 13 Feb 2023 04:56 AM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ आज सुप्रीम कोर्ट के दो नए न्यायाधीशों न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार को शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही नौ महीने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 न्यायाधीश पूरे हो जाएंगे।

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Supreme Court will hear two petitions on collegium dispute today
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की ओर से भेजे गए नामों को मंजूरी देने में केंद्र की तरफ से कथित देरी के मुद्दे पर दायर दो याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सोमवार को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति एसके कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीन फरवरी को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिशों को मंजूरी देने में देरी पर नाराजगी जताते हुए इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताया था।

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अटार्नी जनरल ने सर्वोच्च अदालत को दिया था आश्वासन
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने तीन फरवरी को शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों की पदोन्नति के लिए पिछले साल दिसंबर की कॉलेजियम की सिफारिश को जल्द ही मंजूरी दे दी जाएगी। इसके बाद छह फरवरी को पांच न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, न्यायमूर्ति संजय करोल, न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाई गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट में दो जज आज लेंगे शपथ
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ 13 फरवरी यानी आज सुप्रीम कोर्ट के दो नए न्यायाधीशों न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार को शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही नौ महीने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 न्यायाधीश पूरे हो जाएंगे।
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कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र के बीच टकराव का एक महत्वपूर्ण कारण बन गई है और इस प्रणाली को विभिन्न हलकों से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। शीर्ष अदालत में तीन फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए नामों को सरकार द्वारा मंजूरी न दिए जाने का मुद्दा उठाया था।

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