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अब पारसी तलाक अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 24 Nov 2017 10:52 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी मिलने के बाद पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम की वैधता को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाओमी सैम ईरानी की इस याचिका पर परीक्षण का निर्णय लेते हुए अगले हफ्ते सुनवाई करने का निर्णय लिया है। पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी याचिका की प्रति केंद्र सरकार को देने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि इस मामले में आगे बढ़ने से पहले हम केंद्र सरकार की राय जानना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में 1936 में बने इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि तलाक की प्रक्रिया के दौरान दंपती को भारी प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि जिस तरह से ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार दिया गया है वैसे ही पारसी समाज की परेशानी पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि 1936 में बने इस कानून को अब तक किसी ने चुनौती नहीं दी है।
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सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाओमी सैम ईरानी की इस याचिका पर परीक्षण का निर्णय लेते हुए अगले हफ्ते सुनवाई करने का निर्णय लिया है। पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी याचिका की प्रति केंद्र सरकार को देने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि इस मामले में आगे बढ़ने से पहले हम केंद्र सरकार की राय जानना चाहते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में 1936 में बने इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि तलाक की प्रक्रिया के दौरान दंपती को भारी प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि जिस तरह से ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार दिया गया है वैसे ही पारसी समाज की परेशानी पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि 1936 में बने इस कानून को अब तक किसी ने चुनौती नहीं दी है।