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SC: विधवा को 23 साल बाद मिला मुआवजा, सीजेआई बोले-हम गरीब के चेहरे पर देखना चाहते हैं मुस्कान
Fri, 12 Dec 2025 04:45 AM IST
नितिन गौतम
नई दिल्ली
नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 12 Dec 2025 04:45 AM IST
सार
सीजेआई ने 23 साल बाद एक विधवा महिला को मुआवजा मिलने की घटना पर संतोष जाहिर किया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केस लड़ने वाली महिला की वकील और रेलवे की तारीफ भी की।
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सांकतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
विधवा महिला को 23 साल बाद मुआवजा मिलने पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, हम एक गरीब व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते हैं, और कुछ नहीं। शीर्ष अदालत ने रेलवे और वकीलों के प्रयासों की तारीफ की। सीजेआई ने इस बात का संज्ञान लिया कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद रेलवे आखिरकार एक दुखद घटना की शिकार महिला का पता लगाने और उसे 8.92 लाख रुपये का मुआवजा देने में सफल रहा। 2002 में एक ट्रेन हादसे में महिला ने पति को खो दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने की रेलवे और वकीलों के प्रयासों की तारीफ
जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, बुजुर्ग महिला का पता लगाना एक कठिन काम था। उन्होंने बिहार के एक सुदूर गांव में अपना निवास स्थान बदल लिया था और स्थानीय वकील के निधन के बाद उससे आखिरी बार संपर्क टूट गया था। पीठ ने रेलवे और अधिवक्ता फौजिया शकील के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने विधवा का प्रतिनिधित्व बिना किसी शुल्क के किया ताकि उसे वित्तीय राहत मिल सके। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'इस युवा वकील (शकील) ने, जिन्होंने बिना किसी शुल्क के उनका केस लड़ा, यह सुनिश्चित किया कि उन्हें 23 साल बाद मुआवजा मिले। हमें स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मदद से उन्हें ढूंढ़ना पड़ा और आखिरकार रेलवे ने उन्हें भुगतान किया। हमारा एकमात्र लक्ष्य किसी गरीब के चेहरे पर मुस्कान देखना है, और कुछ नहीं।'
ये भी पढ़ें- Pollution: संसद में गूंजा प्रदूषण का मुद्दा, घुट रही दिल्ली... क्या कर रही सरकार?; आरोपों पर केंद्र का जवाब
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पीड़ित महिला ने 2002 में ट्रेन हादसे में गंवा दिया था पति
साल 2002 में हुए एक हादसे में महिला के पति की मौत हो गई थी। रेलवे ने अपने हलफनामे में कहा कि 6 अक्तूबर के आदेश के अनुपालन में, उसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से महिला संयुक्ता देवी का पता लगाने में कामयाबी हासिल की। रेलवे ने स्थानीय पुलिस स्टेशन की मदद से अपीलकर्ता/दावेदार के घर से पैन कार्ड, आधार कार्ड, ग्राम पंचायत से जारी प्रमाण पत्र और बैंक संबंधी विवरण प्राप्त करने के लिए एक कर्मचारी भेजा। हालांकि, अपीलकर्ता/दावेदार ने बैंक विवरण को छोड़कर सभी दस्तावेज जमा कर दिए। रेलवे ने बताया, उन्होंने बाद में 10 नवंबर, 2025 को स्पीड पोस्ट से अपने बैंक विवरण भेजे। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने 13 नवंबर को उनके बैंक खाते में 8,92,953 लाख रुपये जमा कर दिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने की रेलवे और वकीलों के प्रयासों की तारीफ
जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, बुजुर्ग महिला का पता लगाना एक कठिन काम था। उन्होंने बिहार के एक सुदूर गांव में अपना निवास स्थान बदल लिया था और स्थानीय वकील के निधन के बाद उससे आखिरी बार संपर्क टूट गया था। पीठ ने रेलवे और अधिवक्ता फौजिया शकील के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने विधवा का प्रतिनिधित्व बिना किसी शुल्क के किया ताकि उसे वित्तीय राहत मिल सके। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'इस युवा वकील (शकील) ने, जिन्होंने बिना किसी शुल्क के उनका केस लड़ा, यह सुनिश्चित किया कि उन्हें 23 साल बाद मुआवजा मिले। हमें स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मदद से उन्हें ढूंढ़ना पड़ा और आखिरकार रेलवे ने उन्हें भुगतान किया। हमारा एकमात्र लक्ष्य किसी गरीब के चेहरे पर मुस्कान देखना है, और कुछ नहीं।'
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पीड़ित महिला ने 2002 में ट्रेन हादसे में गंवा दिया था पति
साल 2002 में हुए एक हादसे में महिला के पति की मौत हो गई थी। रेलवे ने अपने हलफनामे में कहा कि 6 अक्तूबर के आदेश के अनुपालन में, उसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से महिला संयुक्ता देवी का पता लगाने में कामयाबी हासिल की। रेलवे ने स्थानीय पुलिस स्टेशन की मदद से अपीलकर्ता/दावेदार के घर से पैन कार्ड, आधार कार्ड, ग्राम पंचायत से जारी प्रमाण पत्र और बैंक संबंधी विवरण प्राप्त करने के लिए एक कर्मचारी भेजा। हालांकि, अपीलकर्ता/दावेदार ने बैंक विवरण को छोड़कर सभी दस्तावेज जमा कर दिए। रेलवे ने बताया, उन्होंने बाद में 10 नवंबर, 2025 को स्पीड पोस्ट से अपने बैंक विवरण भेजे। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने 13 नवंबर को उनके बैंक खाते में 8,92,953 लाख रुपये जमा कर दिए।
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