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रेस्त्रां सरवाना भवन के मालिक को उम्रकैद, तीसरी शादी के चक्कर में की हत्या
Fri, 29 Mar 2019 12:05 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 29 Mar 2019 12:05 PM IST
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पी राजगोपाल
- फोटो : Facebook
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए सरवाना भवन के मालिक पी राजगोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उन्होंने 2001 में अपने एक कर्मचारी को अगवा करके उसकी हत्या कर दी थी। राजगोपाल फिलहाल जमानत पर बाहर है जो उसे 2009 में उच्चतम न्यायालय से मिली थी।
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यह एक हाई प्रोफाइल आपराधिक मामला था। उच्चतम न्यायालय ने सरवाना भवन के मालिक को प्रिंस शांताकुमार की हत्या के मामले में सात जुलाई तक आत्म समर्पण करने के लिए कहा है। मामले से जुड़े पांच अन्य लोगों को भी सजा सुनाई गई है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, शांताकुमार जीवज्योति का पति था जिससे कि राजगोपाल शादी करना चाहता था। होटल मालिक के गुर्गों ने उसकी चेन्नई के वेल्लाचेरी स्थित घर से अक्तूबर 2001 में अपहरण करने के बाद हत्या कर दी थी। शांताकुमार का शव 31 अक्तूबर को कोडाई पहाड़ियों के जंगल में मिला था।
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सेशंस अदालत ने राजगोपाल को हत्या के मामले में दोषी ठहराया था और उसे 10 साल की सजा सुनाई थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने इस सजा को बढ़ाकर उम्रकैद कर दिया था। आरोपी ने इस सजा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। हालांकि उसे सर्वोच्च अदालत से कोई राहत नहीं मिली है।
क्या है पूरा मामला
जीवज्योति के पिता रामास्वामी ने शांताकुमार को अपने बेटे को गणित का ट्यूशन देने के लिए नियुक्त किया था। रामास्वामी राजगोपाल के यहां सहायक प्रबंधक के तौर पर काम करते थे। बाद में रामास्वामी जब मलेशिया चले गए तो उनकी बेटी को शांताकुमार से प्यार हो गया। उन्हें यह शादी मंजूर नहीं थी क्योंकि शांताकुमार क्रिश्चियन था। मगर जोड़े ने परिवार की परवाह किए बिना अप्रैल 1999 में शादी कर ली।कुछ महीनों बाद अपनी ट्रैवल एजेंसी खोलने के लिए जोड़े ने जीवज्योति के चाचा और राजगोपाल से कर्ज के लिए संपर्क किया। जीवज्योति को देखकर राजगोपाल उसपर मोहित हो गया और उसने उसे रोजाना फोन करना शुरू कर दिया। वह उसे महंगे उपहार देने लगा। उसने ज्योति को एक ज्योतिष की सलाह पर अपनी तीसरी पत्नी बनने का ऑफर दिया। मगर वह नहीं मानी तो उसने उनके बीच लड़ाई करवानी शुरू की। राजगोपाल ने शांताकुमार से भी कहा कि वह उसकी पत्नी से शादी करना चाहता है।
परेशान होकर जब जोड़ा चेन्नई से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था तो राजगोपाल के गुर्गों ने उनका अपहरण कर लिया। शांताकुमार की गुंडो ने पिटाई की। जोड़े ने पुलिस में शिकायत की लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं। इसके बाद 26 अक्तूबर 2001 को जोड़े को अगवा करके तिरुचेंदूर लाया गया। जहां शांताकुमार को उसके परिवार से अलग करके उसकी हत्या कर दी गई। साल 2004 में होटल व्यवसायी को इस अपराध का दोषी करार दिया गया था।
Supreme Court upheld the Madras High Court order of conviction of life term to Saravana Bhavan owner, P Rajagopal, for murdering one of his employees in 2001. pic.twitter.com/eDYdhzbt0n
— ANI (@ANI) March 29, 2019