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Supreme Court: महिला सैन्य अधिकारियों को 6 अगस्त तक सेवा से न हटाने का आदेश; सीटी रवि के खिलाफ कार्रवाई पर रोक
Mon, 19 May 2025 08:19 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 19 May 2025 08:19 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला सैन्य अधिकारियों को छह अगस्त को अगली सुनवाई तक सेवा से मुक्त नहीं करने का अंतरिम निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया, यह अंतरिम निर्देश उन सभी अधिकारियों पर लागू होगा, जिन्होंने स्थायी कमीशन से इन्कार को शीर्ष अदालत, हाईकोर्टों और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में चुनौती दी है।
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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह भी कहा, मामले में सुनवाई स्थगित नहीं की जाएगी। सभी मामलों को अंतिम सुनवाई के लिए एक साथ रखते हुए पीठ ने पहले कहा था कि वह 6 और 7 अगस्त को सबसे पहले सेना के मामलों की सुनवाई करेगी। इसके बाद नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल के मामलों की सुनवाई क्रमशः होगी। केंद्र ने 9 मई के आदेश पर स्पष्टीकरण के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने 9 मई के अपने आदेश में सरकार को 6 अगस्त तक उन 69 अधिकारियों को सेवा से मुक्त करने से रोक दिया था, जिन्होंने शीर्ष अदालत के समक्ष स्थायी कमीशन से इन्कार करने को चुनौती दी थी।
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केंद्र ने याचिका कहा था कि अन्य अधिकारी भी हैं, जिन्होंने विभिन्न न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाया है और 9 मई का राहत आदेश कुछ समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। केंद्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अंतरिम संरक्षण उन सभी अधिकारियों पर लागू होगा, जिनके मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसा संरक्षण उन अधिकारियों को भी मिलेगा, जिनके मामले सशस्त्र बल न्यायाधिकरण या हाईकोर्टों में विचाराधीन हैं। कोर्ट ने कहा, जैसा कि पहले निर्देश दिया गया था, यह व्यवस्था पक्षकारों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अगली सुनवाई की तारीख तक जारी रहेगी।
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मुख्य मामले की सुनवाई छह अगस्त को
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामले की सुनवाई 6 अगस्त को तय तिथि पर ही होगी और कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा। इससे पहले, नौ मई को शीर्ष कोर्ट ने केंद्र से कहा था, वह शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला सैन्य अधिकारियों को सेवा मुक्त न करे, जिन्होंने स्थायी कमीशन न देने को चुनौती दी है। कोर्ट ने 69 अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं को अगस्त में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया था।
चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला: तेलंगाना स्थायी निवास नियमों से जुड़ी याचिकाओं पर 2 जून को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना में चिकित्सा पाठ्यक्रमों (मेडिकल कोर्स) में दाखिले को लेकर स्थायी निवास (डोमिसाइल) नियमों पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई 2 जून तक टाल दी। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि नौ याचिकाओं पर सुनवाई अब कोर्ट की गर्मी की छुट्टियों के दौरान आंशिक कार्य दिवस में की जाएगी। इनमें एक याचिका खुद तेलंगाना सरकार की भी है।
तेलंगाना सरकार ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के 2017 के नियमों को 2024 में संशोधित किया गया था और तय किया गया था कि केवल वही छात्र राज्य कोटे में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिला ले सकेंगे, जिन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई लगातार 4 साल तेलंगाना में की हो। हालांकि, तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य के स्थायी निवासियों को सिर्फ इसलिए दाखिले से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कक्षा 9 से 12 तक राज्य से बाहर पढ़ाई की है। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि तेलंगाना को यह तय करने का अधिकार है कि राज्य के कॉलेजों में कौन से छात्र दाखिला ले सकते हैं। सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला नियम बदलने को मजबूर करेगा, जिससे मेडिकल सीटों का आवंटन काफी देर से होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा रखी है। अब 2 जून को मामले की अगली सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना में चिकित्सा पाठ्यक्रमों (मेडिकल कोर्स) में दाखिले को लेकर स्थायी निवास (डोमिसाइल) नियमों पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई 2 जून तक टाल दी। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि नौ याचिकाओं पर सुनवाई अब कोर्ट की गर्मी की छुट्टियों के दौरान आंशिक कार्य दिवस में की जाएगी। इनमें एक याचिका खुद तेलंगाना सरकार की भी है।
तेलंगाना सरकार ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के 2017 के नियमों को 2024 में संशोधित किया गया था और तय किया गया था कि केवल वही छात्र राज्य कोटे में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिला ले सकेंगे, जिन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई लगातार 4 साल तेलंगाना में की हो। हालांकि, तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य के स्थायी निवासियों को सिर्फ इसलिए दाखिले से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कक्षा 9 से 12 तक राज्य से बाहर पढ़ाई की है। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि तेलंगाना को यह तय करने का अधिकार है कि राज्य के कॉलेजों में कौन से छात्र दाखिला ले सकते हैं। सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला नियम बदलने को मजबूर करेगा, जिससे मेडिकल सीटों का आवंटन काफी देर से होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा रखी है। अब 2 जून को मामले की अगली सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सी.टी. रवि के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के बीजेपी एमएलसी सी.टी. रवि के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी। यह मामला मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है, जो उन्होंने पिछले साल बेलगावी विधान परिषद में की थी। दिसंबर 2024 में सी.टी. रवि पर बीएनएस की धारा 75 (यौन उत्पीड़न) और 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्हें 19 दिसंबर को सुवर्ण विधान सौध (बेलगावी) से पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के बीजेपी एमएलसी सी.टी. रवि के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी। यह मामला मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है, जो उन्होंने पिछले साल बेलगावी विधान परिषद में की थी। दिसंबर 2024 में सी.टी. रवि पर बीएनएस की धारा 75 (यौन उत्पीड़न) और 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्हें 19 दिसंबर को सुवर्ण विधान सौध (बेलगावी) से पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने एआईबीई की फीस पर बीसीआई से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) की फीस को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से जवाब मांगा है। वकील संयम गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि बीसीआई सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों से 3,500 रुपये और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) वर्ग से 2,500 फीस के अलावा अन्य चार्ज भी वसूल रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि बीसीआई को भविष्य में ऐसी फीस वसूली से रोका जाए। एआईबीई-19 परीक्षा के लिए अब तक ली गई फीस वापस की जाए। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने बीसीआई को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पहले संयम गांधी को बीसीआई से संपर्क करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) की फीस को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से जवाब मांगा है। वकील संयम गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि बीसीआई सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों से 3,500 रुपये और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) वर्ग से 2,500 फीस के अलावा अन्य चार्ज भी वसूल रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि बीसीआई को भविष्य में ऐसी फीस वसूली से रोका जाए। एआईबीई-19 परीक्षा के लिए अब तक ली गई फीस वापस की जाए। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने बीसीआई को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पहले संयम गांधी को बीसीआई से संपर्क करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए स्पष्ट नीति क्यों नही लाती सरकार?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूछा कि केंद्र सरकार से क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए साफ और स्पष्ट नीति क्यों नहीं बना रही है। कोर्ट ने इस बात को जोर देकर कहा कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने बिटकॉइन ट्रेड को 'हवाला कारोबार जैसा गैरकानूनी व्यापार' बताया। बेंच ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर एक स्पष्ट नीति क्यों नहीं लाती? इसका एक समानांतर काला बाजार चल रहा है, जो अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूछा कि केंद्र सरकार से क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए साफ और स्पष्ट नीति क्यों नहीं बना रही है। कोर्ट ने इस बात को जोर देकर कहा कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने बिटकॉइन ट्रेड को 'हवाला कारोबार जैसा गैरकानूनी व्यापार' बताया। बेंच ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर एक स्पष्ट नीति क्यों नहीं लाती? इसका एक समानांतर काला बाजार चल रहा है, जो अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।