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Supreme Court: नायडू की जमानत के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 26 तक स्थगित, हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

Mon, 12 Feb 2024 03:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 12 Feb 2024 03:54 PM IST
सार

Surpeme Court: कौशल विकास घोटाला मामले में चंद्रबाबू नायडू की जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय 26 फरवरी को सुनवाई करेगा। आंध्र प्रदेश सरकार ने याचिका में उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। 

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Supreme Court Updates: Skill development scam case AP govt's plea against Naidu's bail on Feb 26
तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को कौशल विकास निगम घोटाला मामले में पिछले महीने अग्रिम जमानत दी थी। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की है। याचिका सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के सामने सुनवाई के लिए आई और उसने मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 26 जनवरी तय की। 

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याचिका न्यायमूर्ति बेला एम.त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। नायडू की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। लूथरा ने अदालत को बताया कि वरिष्ठ वकील हरीश सालवे मामले में बहस करेंगे, लेकिन वह आज उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी। लूथरा ने पीठ से सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टालने का आग्रह किया था। 

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शीर्ष अदालत का सुनवाई को दो हफ्ते टालने का फैसला
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार और वकील महफूज अहसान नाजकी पेश हुए। उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के लिए जल्द कोई तारीख तय करने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले पर 26 फरवरी को सुनवाई कर सकती है। याचिका को हफ्ते बाद के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।  

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नायडू की याचिका पर शीर्ष अदालत ने दिया था खंडित फैसला
शीर्ष अदालत ने 16 जनवरी को नायडू की याचिका पर खंडित फैसला सुनाया था। याचिका में कौशल विकास निगम घोटाला मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने से इनकार करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने खंडित फैसला दिया था। फैसले में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए की व्याख्या और उपयुक्तता पर मतभेद था। 

न्यायमूर्ति बोस और त्रिवेदी ने अपने फैसले में क्या कहा था
न्यायमूर्ति बोस ने कहा था कि तेदेपा प्रमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कथित अपराधों की जांच के लिए पहले मंजूरी लेना जरूरी है। वहीं, न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा था कि धारा 17ए को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सकता है। धारा 17ए को 26 जुलाई, 2018 को एक संशोधन के द्वारा लाया गया था। यह प्रावधान किसी पुलिस अधिकारी के लिए अधिनियम के तहत किसी  लोकसेवक द्वारा किए गए कथित अपराध की जांच के वास्ते सक्षम प्राधिकारी से पूर्व मंजूरी लेने की अनिवार्य आवश्यकता निर्धारित करता है। 

पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार हुए थे तेदेपा प्रमुख
नायडू को पिछले साल नौ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर मुख्यमंत्री रहते हुए 2015 में कौशल विकास निगम से पैसे का गबन करने और सरकारी खजाने को 371 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। 

Supreme Court Updates: Skill development scam case AP govt's plea against Naidu's bail on Feb 26
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

अदालत ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
वहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने आज उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। अधिनियम को 19 अप्रैल 2022 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिली थी। यह पुलिस और जांचकर्ताओं को अपराध के आरोपी के भौतिक (फिजिकल) और जैविक (बायोलॉजीकल) नमूने हासिल करने का अधिकार देता है। इस अधिनियम ने 1920 के कैदियों की पहचान अधिनियम की जगह ली थी। उस अधिनियम के तहत दायरा आरोपियों की कुछ उंगलियों और पैर के छापों और तस्वीरों को खींचने तक सीमित था। 

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चुनाव आयोग - फोटो : सोशल मीडिया

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में कथित फर्जी मतदाताओं की प्रविष्टियों (एंट्री) से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने सोमवार को चुनाव आयोग की दलीलों का संज्ञान लिया और कार्यवाही बंद कर दी। उच्चतम न्यायालय ने पांच फरवरी को याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'संविधान बचाओ ट्रस्ट' द्वारा उठाए गए दो मुद्दों पर आयोग से जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने डुप्लिकेट मतदाताओं की प्रविष्टियों के संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र जारी नहीं किया। 

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गौतम नवलखा - फोटो : सोशल मीडिया

सर्वोच्च न्यायालय ने गौतम नवलखा को जमानत पर लगी रोक बढ़ाई
उच्चतम न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में कार्यकर्ता गौतम नवलखा को जमान देने के बबई उच्च न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन  पर लगी रोक बढ़ा दी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने मामले की सुनवाई मार्च के पहले हफ्ते तक के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि उच्च न्यायालय पहले स्टे आदेश दे चुका है। इसलिए, सुनवाई की अगली तारीख तक इसे बढ़ाया जाता है। यह दूसरी बार है जब शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को बढ़ाया है। इससे पहले पांच फरवरी को बढ़ाया गया था।

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