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Supreme Court: तेलंगाना सीएम ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त मांगी माफी; SC से उमर अब्दुल्ला दंपति को समन

Fri, 30 Aug 2024 06:50 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 30 Aug 2024 06:50 PM IST
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Supreme Court Updates, SC reserves verdict on whether person ineligible to be arbitrator can nominate another
Supreme Court - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस विवादास्पद कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या मध्यस्थ बनने के लिए अयोग्य व्यक्ति किसी अन्य को नामित कर सकता है। बहस पूरी होने से पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि विवादों को सुलझाने के तंत्र के रूप में मध्यस्थता को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
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शुक्रवार को बहस के दौरान पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी, एन के कौल और गौरव बनर्जी समेत कई वकीलों की दलीलें सुनीं।

एसजी मेहता ने पीठ से कहा, यह एक ऐसा मुद्दा है, जहां हमारा ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि मध्यस्थता को एक तंत्र के रूप में मजबूत किया जाए और इसलिए, मैंने यह कहकर शुरुआत की कि दोनों में से किसी भी चरम पर कोई भी तर्क उस उद्देश्य को नुकसान पहुंचाएगा, जिससे हम सभी चिंतित हैं। इस पीठ में न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।
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SC कॉलेजियम ने जस्टिस शमीम अहमद के अनुरोध को किया खारिज 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस शमीम अहमद के मद्रास उच्च न्यायालय में तबादले पर पुनर्विचार के अनुरोध को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने शुक्रवार को न्याय के बेहतर प्रशासन के लिए उनके तबादले की बात दोहराई। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए प्रस्ताव के अनुसार, 21 अगस्त, 2024 को मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले और जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, सूर्यकांत और हृषिकेश रॉय वाले कॉलेजियम ने जस्टिस अहमद के तबादले का प्रस्ताव रखा। कॉलेजियम ने कहा हमने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से भी परामर्श किया है। 

SC से उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी को मिला समन

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला को समझौते की संभावना तलाशने के लिए मध्यस्थता के लिए पेश होने को कहा। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र की रिपोर्ट जमा होने के बाद 4 नवंबर को मामले की सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने पहले पायल अब्दुल्ला से उनके पति की तलाक की याचिका पर जवाब मांगा था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 दिसंबर, 2023 को उमर अब्दुल्ला की तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि उनकी अपील में कोई दम नहीं है। उच्च न्यायालय ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला को तलाक का आदेश देने से इनकार करने वाले 2016 के पारिवारिक न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा था।
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वेब सीरीज 'तांडव' को लेकर यूपी ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में वेब सीरीज 'तांडव' के संबंध में दर्ज तीन एफआईआर में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। बता दें कि शीर्ष अदालत वेब सीरीज के निर्देशक अली अब्बास जफर, निर्माता हिमांशु मेहरा, अभिनेता मोहम्मद जीशान अय्यूब और अन्य द्वारा विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने और स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि राज्य में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। वकील ने कहा, हमने तीनों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड में है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ को बताया कि दिल्ली में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन इसे उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया।

तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पर अपनी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के कविता को जमानत दिए जाने से संबंधित उनकी टिप्पणियों पर उच्चतम न्यायालय की ओर से कड़ी आपत्ति जताए जाने पर कहा कि उनकी टिप्पणियों को गलत संदर्भ में समझा गया। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कहा, मैं दोहराता हूं कि मैं न्यायिक प्रक्रिया में दृढ़ विश्वास रखता हूं। मैं प्रेस रिपोर्ट में व्यक्त किए गए बयानों के लिए बिना शर्त खेद व्यक्त करता हूं। न्यायपालिका और इसकी स्वतंत्रता के लिए मेरे मन में अत्यंत सम्मान और आदर है। भारत के संविधान और उसके सिद्धांतों में दृढ़ विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में, मैं न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता हूं और देता रहूंगा।
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