Supreme Court: झारखंड सरकार और कार्यवाहक DGP को नोटिस जारी, छत्तीसगढ़ में नन के खिलाफ कार्यवाही पर लगी रोक
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि सिंघल 16 महीने से जेल में हैं और सुनवाई जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता अपना पासपोर्ट जमा कराए। कोर्ट की अनुमति के बिना वह भारत नहीं छोड़ सकते।
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सुप्रीम कोर्ट ने धनशोधन मामले में भूषण स्टील के पूर्व प्रमोटर नीरज सिंघल को जमानत दे दी है। दरअसल, भूषण स्टील के पूर्व प्रवर्तक नीरज सिंघल पर 46,000 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी से उपजे धनशोधन मामले में कार्रवाई की गई थी। इसी मामले में जमानत के लिए उन्होंने शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस पर कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि सिंघल 16 महीने से जेल में हैं और सुनवाई जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता अपना पासपोर्ट जमा कराए। कोर्ट की अनुमति के बिना वह भारत नहीं छोड़ सकते। यदि कोई उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष के पास जमानत के फैसले को वापस लेने के लिए याचिका लगाने का विकल्प होगा।
सिंघल ने दिल्ली हाईकोर्ट के आठ जनवरी के आदेश के खिलाफ अपील की है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका भी खारिज कर दी थी। इसे भी उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है। ईडी ने उच्च न्यायालय में कहा था कि सिंघल सबसे बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी में शामिल थे। इसमें धनशोधन का अपराध भी शामिल है। इससे 46,000 करोड़ रुपये से अधिक के सार्वजनिक धन की हानि हुई।
जमानत की शर्त के रूप में यूट्यूब चैनल बंद करने के आदेश पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट उच्च न्यायालय के उस निर्देश पर रोक लगा दी, जिसमें यूट्यूबर फेलिक्स जेराल्ड को जमानत देने की शर्तों के तहत अपना चैनल ‘रेडपिक्स 24x7’ बंद करने का निर्देश दिया गया था। जेराल्ड को अपने यूट्यूब चैनल पर एक अन्य यूट्यूबर सवुक्कू शंकर का आपत्तिजनक साक्षात्कार प्रसारित करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। शंकर ने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और राज्य की महिला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ साक्षात्कार के दौरान कुछ टिप्पणियां की थीं। उच्च न्यायालय ने दोनों यूट्यूबर को जमानत देते हुए जेराल्ड को एक शर्त के रूप में अपना चैनल बंद करने को कहा था।
क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
शीर्ष अदलत ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें मुंबई में सार्वजनिक मैदानों पर अभ्यास या अनौपचारिक मैच के दौरान क्रिकेट खिलाड़ियों को पेयजल और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश देने संबंधी याचिका का निपटारा किया गया था। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने कहा कि यह किस तरह की जनहित याचिका है? यदि क्रिकेटरों के लिए शौचालय नहीं हैं तो वे खुद ही इसे देखेंगे। किसी वकील को इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए। पीठ एक वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष जून में उसकी याचिका का निपटारा कर दिया था।
झारखंड सरकार और कार्यवाहक डीजीपी को 'सु्प्रीम' नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेंगलुरू स्थित बार निकाय को बताया कि वह आयकर अपीलीय न्यायाधिकरणों (आईटीएटी) में रिक्तियों से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रहा है। जैसे ही मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई के लिए एकत्रित हुई, बेंगलुरू बार एसोसिएशन (बीबीए) का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने शहर में आईटीएटी में रिक्तियों के बारे में उल्लेख किया। हम मामले पर विचार कर रहे हैं... हम लंबित रिक्तियों के मुद्दे पर विचार करेंगे, सीजेआई ने कहा और जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया। आईटीएटी देश में प्रत्यक्ष करों से संबंधित कानूनों के तहत अपीलों से निपटने के लिए एक अर्ध न्यायिक निकाय है और इसके आदेशों के खिलाफ अपील उच्च न्यायालयों में की जा सकती है।
SC ने नन के खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक
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अदालतें बच्चे को चल संपत्ति नहीं मान सकतीं- सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने दो साल और सात महीने की एक बच्ची की कस्टडी से जुड़े मामले में अपना फैसला सुनाया। दिसंबर 2022 में उसकी मां की अप्राकृतिक मौत हो गई थी और वह फिलहाल अपनी मौसी के पास है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जून 2023 के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें मौसी को बच्चे की कस्टडी उसके पिता और दादा-दादी को सौंपने का निर्देश दिया गया था।
हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति पर किसी का विशेषाधिकार नहीं; हिमाचल हाईकोर्ट कॉलेजियम सामूहिक फैसला करे
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रस्ताव को ध्यान में रखें
शीर्ष अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि हाईकोर्ट के कॉलेजियम को 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से पारित प्रस्ताव को ध्यान में रखना होगा, जिसमें हाईकोर्ट से याचिकाकर्ताओं के नामों पर विचार करने के लिए कहा गया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह तर्क देते हुए याचिका दायर की थी कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने 4 जनवरी के सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम के प्रस्ताव के बावजूद उनके नामों की अनदेखी की।