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SC: जस्टिस वर्मा को सम्मान न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील को जमकर लगाई फटकार, बताया- वे अब भी न्यायाधीश हैं
Mon, 21 Jul 2025 12:07 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 21 Jul 2025 12:07 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर वकील मैथ्यू नेदुम्परा ने याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया। साथ ही वकील को फटकार लगाई। पढ़िए सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को सम्मान न देने पर एक वकील को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वकील शिष्टाचार रखें, यशवंत वर्मा अभी भी न्यायाधीश हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ से वकील मैथ्यूज नेदुम्परा ने कहा था कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली यह उनकी तीसरी याचिका है। इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि इसे अभी खारिज कर दिया जाए? इसे उचित समय पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
जस्टिस वर्मा को वर्मा कहने पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि इसे खारिज करना असंभव है। एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। अब ऐसा लगता है कि वर्मा यही मांग कर रहे हैं। एफआईआर होनी चाहिए, जांच होनी चाहिए। इस पर पीठ ने कड़ा संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि क्या वह आपके मित्र हैं? वह अब भी न्यायमूर्ति वर्मा हैं। आप उन्हें कैसे संबोधित कर सकते हैं? कुछ शिष्टाचार रखें। आप एक विद्वान न्यायाधीश के बारे में बात कर रहे हैं। वह अब भी न्यायाधीश हैं। वकील ने जोर देकर कहा कि मुझे नहीं लगता कि महानता उन पर लागू हो सकती है। मामले को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आप कोर्ट को निर्देश न दें।
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क्या है मामला?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने आंतरिक जांच पैनल की उस रिपोर्ट को अमान्य ठहराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है, जिसमें उन्हें नकदी बरामदगी मामले में दोषी पाया गया था। जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की ओर से 8 मई को संसद से उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का आग्रह करने वाली सिफारिश को रद्द करने की मांग की है। सरकार 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में वर्मा को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है।
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मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ से वकील मैथ्यूज नेदुम्परा ने कहा था कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली यह उनकी तीसरी याचिका है। इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि इसे अभी खारिज कर दिया जाए? इसे उचित समय पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
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जस्टिस वर्मा को वर्मा कहने पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि इसे खारिज करना असंभव है। एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। अब ऐसा लगता है कि वर्मा यही मांग कर रहे हैं। एफआईआर होनी चाहिए, जांच होनी चाहिए। इस पर पीठ ने कड़ा संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि क्या वह आपके मित्र हैं? वह अब भी न्यायमूर्ति वर्मा हैं। आप उन्हें कैसे संबोधित कर सकते हैं? कुछ शिष्टाचार रखें। आप एक विद्वान न्यायाधीश के बारे में बात कर रहे हैं। वह अब भी न्यायाधीश हैं। वकील ने जोर देकर कहा कि मुझे नहीं लगता कि महानता उन पर लागू हो सकती है। मामले को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आप कोर्ट को निर्देश न दें।
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क्या है मामला?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने आंतरिक जांच पैनल की उस रिपोर्ट को अमान्य ठहराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है, जिसमें उन्हें नकदी बरामदगी मामले में दोषी पाया गया था। जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की ओर से 8 मई को संसद से उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का आग्रह करने वाली सिफारिश को रद्द करने की मांग की है। सरकार 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में वर्मा को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है। इसमें यह घोषित करने की मांग की गई है कि उपभोक्ताओं को अनुचित प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं के खिलाफ निवारण के लिए वितरकों और विक्रेताओं के विवरण के अलावा उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता और प्रमाणीकरण के बारे में जानने का अधिकार है।
उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है। इसमें यह घोषित करने की मांग की गई है कि उपभोक्ताओं को अनुचित प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं के खिलाफ निवारण के लिए वितरकों और विक्रेताओं के विवरण के अलावा उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता और प्रमाणीकरण के बारे में जानने का अधिकार है।
इंडियाबुल्स से जुड़े मामले में पेश न होने पर सीबीआई को सुप्रीम फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लि. (आईएचएफएल) से जुड़े एक मामले में पेश न होने पर सीबीआई को फटकार लगाई। यह मामला आईएचएफएल, जिसे अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, की ओर से कॉरपोरेट संस्थाओं को संदिग्ध ऋण देने से जुड़ा हुआ है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, सीबीआई को नोटिस जारी करने के बावजूद वह हमारे सामने पेश क्यों नहीं हुई? सीबीआई कैसे कह सकती है कि हम अदालत में पेश नहीं होंगे? क्या सीबीआई में हमारे सामने पेश न होने की हिम्मत है? सीबीआई के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को हमारे सामने आने दीजिए। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी मामले की जांच कर रही है और जहां तक सीबीआई का सवाल है, तो एक औपचारिक शिकायत दर्ज होनी चाहिए। पीठ ने कहा, सीबीआई न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर मामला दर्ज कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लि. (आईएचएफएल) से जुड़े एक मामले में पेश न होने पर सीबीआई को फटकार लगाई। यह मामला आईएचएफएल, जिसे अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, की ओर से कॉरपोरेट संस्थाओं को संदिग्ध ऋण देने से जुड़ा हुआ है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, सीबीआई को नोटिस जारी करने के बावजूद वह हमारे सामने पेश क्यों नहीं हुई? सीबीआई कैसे कह सकती है कि हम अदालत में पेश नहीं होंगे? क्या सीबीआई में हमारे सामने पेश न होने की हिम्मत है? सीबीआई के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को हमारे सामने आने दीजिए। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी मामले की जांच कर रही है और जहां तक सीबीआई का सवाल है, तो एक औपचारिक शिकायत दर्ज होनी चाहिए। पीठ ने कहा, सीबीआई न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर मामला दर्ज कर सकती है।
हिरासत में प्रताड़ित कांस्टेबल को 50 लाख का मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा स्थित संयुक्त पूछताछ केंद्र (जेआईसी) में हिरासत में प्रताड़ित किए गए पुलिस कांस्टेबल खुर्शीद अहमद चौहान को 50 लाख मुआवजा देने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया। हिरासत में हिंसा के विरुद्ध सांविधानिक सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करते हुए अदालत ने इस दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों को तत्काल गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने खुर्शीद अहमद चौहान की उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 309 (आत्महत्या का प्रयास) के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इन्कार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा स्थित संयुक्त पूछताछ केंद्र (जेआईसी) में हिरासत में प्रताड़ित किए गए पुलिस कांस्टेबल खुर्शीद अहमद चौहान को 50 लाख मुआवजा देने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया। हिरासत में हिंसा के विरुद्ध सांविधानिक सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करते हुए अदालत ने इस दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों को तत्काल गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने खुर्शीद अहमद चौहान की उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 309 (आत्महत्या का प्रयास) के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इन्कार कर दिया था।
रूसी महिला का बच्चे को लेकर रूस जाना घोर अवमानना
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय पति के साथ अपने बच्चे की कस्टडी को लेकर मुकदमा लड़ रही रूसी महिला नेपाल सीमा के रास्ते नाबालिग बच्चे के साथ देश छोड़कर चली गई है। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इसे अस्वीकार्य और अदालत की घोर अवमानना बताया। पीठ ने कहा, उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है। उसे डुप्लीकेट पासपोर्ट कैसे मिल सकता है? रूसी दूतावास के कुछ अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं हो सकता था। यह अदालत की घोर अवमानना है। यह अस्वीकार्य है। हम रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए कठोर आदेश और निर्देश पारित करेंगे और अधिकारियों को कार्रवाई करनी होगी।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय पति के साथ अपने बच्चे की कस्टडी को लेकर मुकदमा लड़ रही रूसी महिला नेपाल सीमा के रास्ते नाबालिग बच्चे के साथ देश छोड़कर चली गई है। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इसे अस्वीकार्य और अदालत की घोर अवमानना बताया। पीठ ने कहा, उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है। उसे डुप्लीकेट पासपोर्ट कैसे मिल सकता है? रूसी दूतावास के कुछ अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं हो सकता था। यह अदालत की घोर अवमानना है। यह अस्वीकार्य है। हम रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए कठोर आदेश और निर्देश पारित करेंगे और अधिकारियों को कार्रवाई करनी होगी।