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Supreme Court: 'पास होने की वजह से सभी यहां आते हैं..', ठग सुकेश की पत्नी की याचिका पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
Wed, 03 Sep 2025 12:49 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 03 Sep 2025 12:49 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को लीना पॉलोज पर कड़ी टिप्पणी की, जो कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी हैं। वह दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका पर जल्दी सुनवाई की मांग कर रही थीं। यह मामला 200 करोड़ रुपये की फिरौती से जुड़ा हुआ है।
जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है। बेंच ने कहा, यह स्वीकार्य नहीं है। सिर्फ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट नजदीक है, सभी यहां आते हैं और फिर मामले को टालने की मांग करते हैं।
लीना के वकील ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में हर दिन मामले की सूचीबद्ध होने के बावजूद सुना नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह मामला बुधवार को भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। उन्होंने इसे स्थगित करने की मांग की। बेंच ने मामले को स्थगित करने की मंजूरी दी।
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दिल्ली पुलिस ने चंद्रशेखर के खिलाफ आरोप लगाया है कि उन्होंने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से 200 करोड़ रुपये ठगे। देश में उनके खिलाफ कई जांच चल रही हैं। चंद्रशेखर और पॉलोज धनशोधन मामले में भी चल रही प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। दोनों को दिल्ली पुलिस ने इस फिरौती मामले में गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने इस मामले में मकोका भी लगाया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि लीना, चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों ने हवाला के रास्ते इस्तेमाल किए और नकली कंपनियां बनाईं ताकि अपराध से प्राप्त धन को छिपाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई 17 सितंबर तक टाली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एल्गार परिषद के मामले में आरोपी वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई 17 सितंबर तक के लिए टाल दी। जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह फैसला तब लिया, जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने और समय मांगा। गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह याचिका 2023 से लंबित है।
ग्रोवर ने कहा कि गाडलिंग को जेल में छह साल से ज्यादा हो चुके हैं और अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं। इससे पहले 26 अगस्त को चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी आर गवई को बताया गया था कि जस्टिस एम एम सुंदरेश ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इसके बाद इस याचिका को आज के लिए सूचीबद्ध किया गया था। गाडलिंग की याचिका अब तक सुप्रीम कोर्ट में 11 बार टाली जा चुकी है। आठ अगस्त को ग्रोवर ने इस मामले का जिक्र किया था और जल्द सुनवाई की मांग की थी।
विदेशी नागरिक अपराध करके भारत से फरार न हों, विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस पर विचार करे कि भारत में अपराध करने वाले विदेशी नागरिकों को जमानत पर रिहा होने के बाद भागने से कैसे रोका जाए। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि एक विदेशी नागरिक जमानत मिलने के बाद फरार हो गया है, जिस पर धोखाधड़ी का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने चार दिसंबर 2023 को झारखंड हाईकोर्ट के मई 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें आरोपी एलेक्स डेविड को जमानत दी गई थी।
जब यह मामला 26 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के सामने आया, तो यह बताया गया कि भारत और नाइजीरिया के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए आरोपी की वापसी की संभावना नहीं दिखती। शीर्ष कोर्ट ने कहा, हम यह केंद्र सरकार पर छोड़ते हैं कि वह ऐसी उचित नीति बनाए या अन्य जरूरी कदम उठाए, जिससे विदेशी नागरिक अपराध करके भारत से फरार न हो सकें। एलेक्स डेविड के खिलाफ आईटी अधिनियम और धोखाधड़ी से जुड़े कई आरोप थे। हाईकोर्ट से उसे जमानत मिली, लेकिन बाद में वह जमानत तोड़कर फरार हो गया। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
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जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है। बेंच ने कहा, यह स्वीकार्य नहीं है। सिर्फ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट नजदीक है, सभी यहां आते हैं और फिर मामले को टालने की मांग करते हैं।
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लीना के वकील ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में हर दिन मामले की सूचीबद्ध होने के बावजूद सुना नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह मामला बुधवार को भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। उन्होंने इसे स्थगित करने की मांग की। बेंच ने मामले को स्थगित करने की मंजूरी दी।
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दिल्ली पुलिस ने चंद्रशेखर के खिलाफ आरोप लगाया है कि उन्होंने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से 200 करोड़ रुपये ठगे। देश में उनके खिलाफ कई जांच चल रही हैं। चंद्रशेखर और पॉलोज धनशोधन मामले में भी चल रही प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। दोनों को दिल्ली पुलिस ने इस फिरौती मामले में गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने इस मामले में मकोका भी लगाया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि लीना, चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों ने हवाला के रास्ते इस्तेमाल किए और नकली कंपनियां बनाईं ताकि अपराध से प्राप्त धन को छिपाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई 17 सितंबर तक टाली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एल्गार परिषद के मामले में आरोपी वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई 17 सितंबर तक के लिए टाल दी। जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह फैसला तब लिया, जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने और समय मांगा। गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह याचिका 2023 से लंबित है।
ग्रोवर ने कहा कि गाडलिंग को जेल में छह साल से ज्यादा हो चुके हैं और अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं। इससे पहले 26 अगस्त को चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी आर गवई को बताया गया था कि जस्टिस एम एम सुंदरेश ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इसके बाद इस याचिका को आज के लिए सूचीबद्ध किया गया था। गाडलिंग की याचिका अब तक सुप्रीम कोर्ट में 11 बार टाली जा चुकी है। आठ अगस्त को ग्रोवर ने इस मामले का जिक्र किया था और जल्द सुनवाई की मांग की थी।
विदेशी नागरिक अपराध करके भारत से फरार न हों, विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस पर विचार करे कि भारत में अपराध करने वाले विदेशी नागरिकों को जमानत पर रिहा होने के बाद भागने से कैसे रोका जाए। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि एक विदेशी नागरिक जमानत मिलने के बाद फरार हो गया है, जिस पर धोखाधड़ी का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने चार दिसंबर 2023 को झारखंड हाईकोर्ट के मई 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें आरोपी एलेक्स डेविड को जमानत दी गई थी।
जब यह मामला 26 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के सामने आया, तो यह बताया गया कि भारत और नाइजीरिया के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए आरोपी की वापसी की संभावना नहीं दिखती। शीर्ष कोर्ट ने कहा, हम यह केंद्र सरकार पर छोड़ते हैं कि वह ऐसी उचित नीति बनाए या अन्य जरूरी कदम उठाए, जिससे विदेशी नागरिक अपराध करके भारत से फरार न हो सकें। एलेक्स डेविड के खिलाफ आईटी अधिनियम और धोखाधड़ी से जुड़े कई आरोप थे। हाईकोर्ट से उसे जमानत मिली, लेकिन बाद में वह जमानत तोड़कर फरार हो गया। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।