Supreme Court: यूक्रेन से लौटे छात्रों से लेकर EVM पर रोक वाली याचिका तक, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें
जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया गया कि उन्हें इस मामले पर निर्देश लेने की जरूरत है।
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बता दें कि रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। युद्ध के शुरू होने के बाद कई भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होना पड़ा और भारत वापस लौटना पड़ा था। अब इन छात्रों की मांग है कि उनकी मेडिकल की पढ़ाई जारी रखा जाए। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया गया कि उन्हें इस मामले पर निर्देश लेने की जरूरत है।
वकील एश्वर्या सिन्हा के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि करीब 14,000 भारतीय छात्रों की शिक्षा पूरी तरह से बंद हो गई है। उनके करियर को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया गया है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार भ्रामक हो गए हैं।
वकील ने यह भी कहा कि यहां याचिकाकर्ताओं समेत निकाले गए छात्र भारी मानसिक कठिनाई और पीड़ा से गुजर रहे हैं क्योंकि उनका पूरा करियर लटका हुआ है और फरवरी 2022 से उनकी शिक्षा लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। युद्धग्रस्त देश में शांति की बहाली की कोई संभावना नहीं है।
याचिका में कहा गया है, "मौजूदा मामले में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि याचिकाकर्ता न तो यूक्रेन में अपने संबंधित संस्थानों में अपनी शिक्षा को फिर से शुरू करने की स्थिति में हैं और न ही मौजूदा नियमों के तहत उन्हें भारत में संस्थानों में अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति मिल रही है।"
याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 45 के तहत एनएमसी पर भारतीय मेडिकल छात्रों के प्रवास के लिए दिशानिर्देश और एसओपी तैयार करने के लिए एक उचित निर्देश जारी करने की भी मांग की है, जिन्हें समान शैक्षणिक वर्ष में एकमुश्त उपाय के रूप में यूक्रेन से भारतीय मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया है।
जस्टिस दुरैस्वामी मद्रास हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
मद्रास हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस एम. दुरैस्वामी को सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वह 13 सितंबर को कार्यभार ग्रहण करेंगे। कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मौजूदा चीफ जटिस मुनीश्वर नाथ भंडारी 12 सितंबर की शाम को सेवानिवृत्त होंगे।
ईवीएम पर रोक लगाने की मांग खारिज
दरअसल, यह याचिका पहले दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई थी जिसे खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने 3 अगस्त,2021 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसे आज खारिज कर दिया गया। याचिका में कहा गया था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें देश की चुनाव प्रक्रिया में मतपत्रों को लाना जरूरी है। ईवीएम ने भारत में मतपत्रों की जगह ली जबकि इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
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ईडी निदेशक के कार्यकाल से जुड़ी याचिका पर केंद्र की दलील
केंद्र सरकार ने जनहित याचिकाओं पर सवाल उठाया। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने इन याचिकाओं को दबाव की रणनीति बताया। केंद्र की यह दलील प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) प्रमुख के कार्यकाल विस्तार और पांच साल तक के ऐसे विस्तार की अनुमति के प्रावधान वाले संशोधित कानून के खिलाफ नेताओं द्वारा दायर याचिका के मद्देनजर आई है। कोर्ट ने ऐसी आठ जनहित याचिकाओं के लिए 19 सितंबर की तारीख तय की है। इनमें रणदीप सिंह सुरजेवाला और महुआ मोइत्रा की याचिकाएं भी शामिल हैं।
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टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी ले सकते हैं
प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी इलाज के लिए विदेश जाने के लिए स्थानीय अदालत से मंजूरी ले सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की संयुक्त दलीलों पर ध्यान दिया और बनर्जी की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। विधि अधिकारी ने कहा कि बनर्जी स्थानीय अदालत से मंजूरी ले सकते हैं।
सिब्बल ने कहा कि अगर ईडी इस मुद्दे पर बनर्जी की याचिका का विरोध नहीं करती है तो वह बयान का स्वागत करेंगे। इससे पहले शीर्ष अदालत ने इलाज के लिए दुबई जाने की मंजूरी मांगने वाली बनर्जी की याचिका पर सोमवार को सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। इसने 17 मई को तृणमूल कांग्रेस नेता और उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी को 24 घंटे का अग्रिम नोटिस देने के बाद दिल्ली तलब करने के बजाय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से उनके कोलकाता कार्यालय में जांच करने के लिए कहा था।