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SC: जेलों में जातिगत भेदभाव पर केंद्र-राज्यों को नोटिस; एल्गार मामले में जमानत याचिका पर NIA से मांगा जवाब
Wed, 03 Jan 2024 09:07 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 03 Jan 2024 09:07 PM IST
सार
जेल में जातिगत भेदभाव को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों को नोटिस जारी किया हैं। एल्गार मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और एनआईए से जवाब मांगा हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जेलों में जातिगत भेदभाव और अलग-अलग जाति आधारित मैंनुअल काम आवंटित करने पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही हैं। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार और 12 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया हैं। गौरतलब हैं कि याचिका में जेलों में जातिगत भेदभाव और उन्हें अलग-अलग जातियों के आधार पर काम देने पर रोक की मांग की गई हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि बैरक में आवंटित शारीरिक श्रम से लेकर जाति आधारित भेदभाव होता है और गैर-अधिसूचित जनजातियों और आदतन अपराधियों के बीच भी ऐसा भेदभाव होता है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मैंने जाति पर भेदभाव के बारे में नहीं सुना है। अलगाव आमतौर पर विचाराधीन कैदियों और दोषियों पर आधारित होता है।
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याचिकाकर्ता का कहना है कि बैरक में आवंटित शारीरिक श्रम से लेकर जाति आधारित भेदभाव होता है और गैर-अधिसूचित जनजातियों और आदतन अपराधियों के बीच भी ऐसा भेदभाव होता है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मैंने जाति पर भेदभाव के बारे में नहीं सुना है। अलगाव आमतौर पर विचाराधीन कैदियों और दोषियों पर आधारित होता है।
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आरोपी की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार-NIA से मांगा जवाब
एल्गार मामले में आरोपी डीयू प्रोफेसर हनी बाबू की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस और न्यायमूर्ति संजय की पीठ मामले पर सुनवाई कर रही हैं। गौरलतब हैं कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को हनी बाबू की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। मामले की जांच कर रही एनआईए ने हनी बाबू पर प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा को फैलाने का आरोप लगाया है। आरोपी को जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जो वर्तमान में नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में बंद हैं।
कोचर दंपत्ति से जुड़े CBI की याचिका पर सुनवाई 12 जनवरी तक स्थगित
ऋण धोखाधड़ी मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ और प्रबंध निदेशक चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर की जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी तक के लिए टाल दी हैं। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने यह कहते हुए मामले को स्थगित कर दिया कि बॉम्बे हाईकोर्ट के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक की मंजूरी के खिलाफ पांच जनवरी को कोचर के मामले की सुनवाई करने वाला था।
गौरतलब हैं कि वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण मामले में दंपति को 23 दिसंबर, 2022 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। कोचर के अलावा, सीबीआई ने मामले में वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत को भी गिरफ्तार किया था।
गौरतलब हैं कि वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण मामले में दंपति को 23 दिसंबर, 2022 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। कोचर के अलावा, सीबीआई ने मामले में वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत को भी गिरफ्तार किया था।