SC: सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमाएं बदलेगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट की समिति ने दी हरी झंडी की सिफारिश
कमेटी ने अपनी 22 जुलाई, 2025 को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया कि इस बदलाव का मकसद टाइगर ब्रीडिंग पैटर्न को ध्यान में रखते हुए संरक्षण को मजबूत करना है। नई योजना के तहत मुख्य टाइगर हैबिटेट को 881.11 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 924.49 वर्ग किलोमीटर किया गया है, जबकि बफर ज़ोन को घटाकर 203.20 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया है। इससे रिजर्व का कुल क्षेत्रफल मामूली रूप से 1,127.68 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा।
विवाद के केंद्र में खनन और मंदिर की गतिविधियां
रिपोर्ट में पांडुपोल हनुमान मंदिर तक तीर्थयात्रियों की आवाजाही और खनन से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया है। मंदिर तक निजी वाहनों की आवाजाही रोकने और इलेक्ट्रिक या सीएनजी बसें चलाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में लकड़ी जलाकर भोजन बनाने पर रोक लगाने और एलपीजी व सोलर एनर्जी के उपयोग की सलाह दी गई है।
खनन को लेकर विवाद, पर्यावरणविदों की आपत्ति
कुछ पर्यावरणविदों, पूर्व वन अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सीमाएं बदलने के पीछे का असली उद्देश्य मार्बल और डोलोमाइट खनन को दोबारा शुरू करना है। हालांकि कमेटी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बदलाव से पहले वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी।
वैज्ञानिक आधार पर किया गया सीमांकन
कमेटी का दावा है कि सीमाओं का पुनर्गठन वैज्ञानिक आंकड़ों जैसे कैमरा ट्रैप्स और टाइगर मूवमेंट पर आधारित है, जिससे जैविक संपर्क और संरक्षण मूल्य में वृद्धि होगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस बदलाव से कोई भी गांव विस्थापित नहीं होगा और यह सिर्फ पारिस्थितिक कारणों पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह इस सिफारिश को जल्द मंजूरी दे ताकि लंबित खनन मामलों पर उचित फैसला लिया जा सके।
पीएमएलए मामले में सुप्रीम अदालत जांचेंगी समीक्षा याचिकाओं की योग्यता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय को धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तारी, संपत्ति कुर्क करने, तलाश व जब्ती के अधिकारों को बरकरार रखने संबंधी अपने 2022 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं की पोषणीयता पर दलीलें सुनेगा।
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा, ईडी ने तीन प्रारंभिक मुद्दे प्रस्तावित किए हैं जो मुख्य रूप से समीक्षा याचिकाओं की पोषणीयता से जुड़े हैं। पीठ ने कहा, समीक्षा याचिकाकर्ताओं ने उसके विचार के लिए 13 प्रश्न प्रस्तावित किए हैं। पीठ ने कहा, चूंकि प्रस्तावित मुद्दे पुनर्विचार कार्यवाही में उठ रहे हैं, इसलिए हम सबसे पहले पुनर्विचार याचिकाओं की पोषणीयता के मुद्दे पर पक्षकारों की सुनवाई करने का प्रस्ताव रखते हैं। उसके बाद पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए जाने वाले प्रस्तावित प्रश्नों पर सुनवाई करेंगे। पीठ ने कहा, यदि पुनर्विचार याचिकाएं पोषणीय लगती हैं, तो अंतत: विचार के लिए उठने वाले प्रश्नों का निर्धारण भी न्यायालय की ओर से ही किया जाएगा।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, सबसे पहले यह मुद्दा उठाने का ही औचित्य है कि क्या पुनर्विचार याचिका विचार योग्य है। हम सभी जानते हैं कि पुनर्विचार की अपनी सीमाएं होती हैं... कभी-कभी हमारा दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन फिर भी हम उसे प्रतिस्थापित नहीं कर सकते। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तारीख तय कर दी।