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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Updates: Chief Justice of India Sanjiv Khanna On view of pollution in Delhi Know all

SC: 'न्यायाधीशों से जहां भी संभव हो, ऑनलाइन सुनवाई की इजाजत देने को कहा', दिल्ली में प्रदूषण पर सीजेआई खन्ना

Tue, 19 Nov 2024 11:24 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 19 Nov 2024 11:24 AM IST
सार

एससीबीए अध्यक्ष ने प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि प्रदूषण नियंत्रण से बाहर हो रहा है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ‘हाइब्रिड’ सुनवाई यानी ऑननाइन और ऑफलाइन, दोनों ही माध्यम से सुनवाई जारी है और वकील ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प चुन सकते हैं।

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Supreme Court Updates: Chief Justice of India Sanjiv Khanna On view of pollution in Delhi Know all
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कुछ वरिष्ठ वकीलों के उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें अदालतों के पूरी तरह से वर्चुअल कामकाज की अनुमति देने को कहा गया था। सीजेआई ने वकीलों से कहा कि अदालतें हाइब्रिड मोड में काम करती हैं और वे सुनवाई के लिए वर्चुअल रूप से उपस्थित होने का विकल्प चुन सकते हैं। दिल्ली में प्रदूषण के मद्देनजर सीजेआई ने कहा कि न्यायाधीशों से कहा जा रहा है कि जहां भी संभव हो, वर्चुअल सुनवाई करें।

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किस-किस ने की मांग?
सीजेआई और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ जैसे ही बैठी, वैसे ही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष कपिल सिब्बल और अन्य वकीलों ने दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण की बदतर होती स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने पीठ से इससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की मांग की।
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किसने-क्या कहा?

सिब्बल ने पीठ से कहा कि प्रदूषण नियंत्रण से बाहर हो रहा है। इसे कम करने की जरूरत है। यह संदेश अन्य अदालतों तक जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से शीर्ष अदालत को डिजिटल माध्यम से सुनवाई करनी चाहिए। 

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प्रधान न्यायाधीश ने क्या कहा?
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हमने सभी को समायोजित करने का संदेश दिया है। इसके अलावा ऑनलाइन की सुविधा वैसे भी उपलब्ध है। हमने सभी न्यायाधीशों से कहा है कि जहां भी संभव हो, वहां डिजिटल सुनवाई की अनुमति दी जाए। वकील ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प चुन सकते हैं।


बीते दिन सुनवाई में क्या हुआ?
इससे पहले शीर्ष अदालत ने सोमवार को संज्ञान लिया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अत्यधिक गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर राज्यों को चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के चौथे चरण के तहत प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने के लिए तुरंत टीम गठित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध अगले आदेश तक जारी रहेंगे।

 

 सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में मलयालम अभिनेता को अग्रिम जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मलयालम अभिनेता सिद्दीकी को दुष्कर्म के एक मामले में अंतिम अग्रिम जमानत दे दी। सिद्दीकी पर एक युवा अभिनेत्री द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने 2016 में कथित घटना के संबंध में 2024 में एफआईआर दर्ज करने में देरी पर सवाल उठाया। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह भी कहा कि पीड़िता में फेसबुक पर पोस्ट लिखने का साहस था लेकिन उसने पुलिस से संपर्क नहीं किया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और केरल सरकार की ओर से पेश रंजीत कुमार तथा पीड़िता की ओर से वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभिनेता को दी गई अंतरिम जमानत को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया।

अदालत ने कहा कि वह मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जमानत के लिए विस्तृत कारण नहीं बता रही है। पीठ ने यह भी कहा कि कथित घटना 2016 में हुई थी और शिकायतकर्ता ने 2018 में फेसबुक पर पोस्ट करके कथित यौन शोषण के संबंध में अपीलकर्ता सहित 14 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए थे। सुनवाई के दौरान रोहतगी ने कहा कि अभिनेता एक वरिष्ठ नागरिक हैं और 2016 की घटना के बारे में 2024 में शिकायत दर्ज की गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अभिनेता ने महिला द्वारा शिकायत दर्ज कराने से एक दिन पहले 26 अगस्त, 2024 को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह घटना एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी एक्टर्स और वीमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) के बीच टकराव का नतीजा थी। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पुलिस के साथ सहयोग किया लेकिन उसके लिए 2016 में इस्तेमाल किए गए गैजेट को जमा करना संभव नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि याचिकाकर्ता ने 2016 में एक फिल्म के प्रीव्यू के लिए नीला थिएटर में ही महिला से मुलाकात की थी। पीड़िता के वकील ग्रोवर ने दावा किया कि अभिनेता ने 2014 में उससे संपर्क किया था और उसकी तस्वीरों को लाइक करके और उसे मैसेज करके उसे अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया था। उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे एक फिल्म के प्रीव्यू के लिए बुलाया और उसे मैस्कॉट होटल ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

वकील ने दावा किया कि हेमा समिति की रिपोर्ट के प्रकाशन और केरल हाईकोर्ट द्वारा इसका संज्ञान लेने के बाद महिला ने हिम्मत जुटाई।

राज्य के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को उसके सोशल मीडिया खातों का विवरण प्राप्त करने के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है। 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था। इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में अग्रिम जमानत के लिए उसकी याचिका को खारिज कर दिया था। सिद्दीकी के खिलाफ मामला एक अभिनेत्री की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसने उन पर 2016 में तिरुवनंतपुरम के मैस्कॉट होटल में उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वोत्तर राज्यों में परिसीमन प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाया 
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की ओर से 2020 में स्थगन को रद्द करने वाले आदेश के बावजूद अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और असम में परिसीमन प्रक्रिया में देरी पर चिंता जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए "एक बार राष्ट्रपति अधिसूचना रद्द कर दें तो यह पर्याप्त है। इसमें अब सरकार कहां से आती है?सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से कहा कि यह काम किया जाना है। यह एक वैधानिक आदेश है और इसलिए आपको इसका अनुपालन करना होगा। सीजेआई ने नटराज को इस मामले में भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्देश लेने को कहा। एएसजी ने पीठ से कहा कि अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के लिए विचार-विमर्श चल रहा है, लेकिन मणिपुर में जारी हिंसा के कारण वहां स्थिति अनुपयुक्त हो गई है। पीठ ने इसके बाद ‘पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और नगालैंड राज्य के लिए परिसीमन मांग समिति’ की याचिका पर सुनवाई जनवरी 2025 तक स्थगित कर दी।

याचिकाकर्ता के वकील जी गंगमेई ने कहा कि राष्ट्रपति के 2020 के आदेश ने परिसीमन को कानूनी रूप से अनिवार्य बना दिया है। रिट याचिका दायर किए दो साल बीत चुके हैं, फिर भी अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर में परिसीमन शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सिर्फ असम में प्रगति हुई है, कानून और न्याय मंत्रालय के आदेश के बाद अगस्त 2023 में परिसीमन पूरा हो गया है।

सार्वजनिक स्थानों पर चाइल्डकेयर फीडिंग रूम के लिए नीति बनाए केंद्र
 सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग रूम और चाइल्डकेयर रूम के निर्माण से संबंधित नीति बनाने का सुझाव दिया। शीर्ष अदालत सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की देखभाल और बच्चों को खिलाने के लिए अलग और विशेष स्थान की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि याचिका पर कोई भी निर्देश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता की मांगों पर केंद्र के विचार सुनना उचित होगा। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वर्तमान में इस संबंध में कोई ठोस कानून या नीति नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र इसके लिए कार्ययोजना तैयार करे ताकि राज्य इसे लागू कर सकें। पीठ ने इन निर्देशों के बाद मामले की सुनवाई 10 दिसंबर तय कर दी। याचिकाकर्ता एनजीओ मात्र स्पर्श ने वकील नेहा रस्तोगी, अनिमेष रस्तोगी और अभिमन्यु श्रेष्ठ के माध्यम से याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने कहा था कि आज के समय में जब महिलाएं देश की आर्थिक वृद्धि में समान रूप से भाग ले रही हैं और बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकल रही हैं, सभी सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग रूम और चाइल्ड केयर रूम बहुत जरूरी हैं। सभी सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग रूम और चाइल्ड केयर रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए ताकि महिलाएं सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें और उनकी निजता का भी उल्लंघन न हो। याचिका में कहा गया कि जीवन और गोपनीयता का अधिकार अविभाज्य है और संविधान का अभिन्न अंग है।
 

सोने की तस्करी मामले में ईडी की याचिका पर सुनवाई छह हफ्ते टली
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी, जिसमें सोने की तस्करी के मामले को केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। जस्टिस हृषिकेश मुखर्जी और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय के वकील की मांग पर इस मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी है।

ईडी के वकील ने अदालत को बताया कि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए मामले की सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा दी जाए। वहीं, केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी की ओर से बार-बार मामले की सुनवाई टालने को कहा जा रहा है। पीठ ने इस पर मौखिक रूप से कहा, ऐसा लगता है कि इस मामले को आग बढ़ाने में जांच एजेंसी की कोई दिलचस्पी नहीं है। पीठ ने कहा कि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की मुश्किल को देखते हुए एक बार फिर याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई को छह सप्ताह के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले केंद्र सरकार से पूछा था कि वह बताए कि क्या राजनयिक के सामान की जांच की जा सकती है या उन्हें जांच से छूट मिली हुई है। उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत प्रवर्तन निदेशालय के सोने की तस्करी मामले को केरल से कर्नाटक स्थानांतरित करने का यह कहते हुए अनुरोध किया था कि केरल में ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ सुनवाई संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने शिअद नेताओं से पूर्व जज के खिलाफ बयानों पर खेद व्यक्त करने को कहा
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेताओं सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया से पूर्व न्यायाधीश रणजीत सिंह के खिलाफ अपने बयानों पर खेद व्यक्त करने को कहा। ये दोनों नेता पंजाब में गोलीबारी,बेअदबी और पुलिस की घटनाओं की जांच करने वाले पैनल के प्रमुख थे।

सुप्रीम कोर्ट ने भूमि आवंटन मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप एन शर्मा को अग्रिम जमानत दे दी
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के भुज जिले में लगभग 150 एकड़ भूमि के आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित एक मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप एन शर्मा को गिरफ्तारी से राहत दे दी। हालांकि वे कई अन्य मामलों में पहले से ही चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं।

 प्रदीप एन शर्मा को राहत देते हुए शीर्ष कोर्ट ने 1 मार्च, 2019 के गुजरात हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। तब गुजरात हाई कोर्ट ने 2012 में दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

जमानत राशि दे पाने में अक्षमता के कारण कैदियों के जेल से बाहर न आ पाने पर शीर्ष कोर्ट चिंतित

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मिलने, लेकिन जमानत राशि जमा न कर पाने के कारण कैदियों के जेल से रिहा न हो पाने पर चिंता जताई है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पूछा कि इस तरह के मामलों का पता लगा पाने के लिए ई प्रिजन मॉड्यूल पर उपलब्ध जानकारी का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। ई प्रिजन मॉड्यूल एक समग्र जेल प्रबंधन प्रणाली है। पीठ ने 2021 के एक मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा, क्या हम उन लोगों के मामले को हाथ में ले सकते हैं जो जमानत राशि न होने के कारण जमानत पर बाहर नहीं आ पा रहे। 2021 के इस मामले का शीर्षक ‘जमानत देने के लिए नीतिगत रणनीति’ है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी ई प्रिजन मॉड्यूल के बारे में दी जा रही जानकारियों के बीच में की। पीठ ने संबंधित पक्षों के वकीलों से कहा कि इस मुद्दे पर भी चर्चा करें क्योंकि यह ई प्रिजन मॉड्यूल से किसी न किसी तरह जुड़ा हुआ है।  पीठ ने कहा, कृपया इस मामले को भी देखें। इस मॉड्यूल पर जो जानकारी उपलब्ध है उसका इस्तेमाल उन लोगों को पता लगाने में किया जा सकता है जो पैसा न भर पाने के कारण जमानत पर बाहर नहीं आ पा रहे हैं। मामले में अगले सप्ताह भी सुनवाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने देशभर में दोषियों को जेल से स्थाई रूप से रिहा करने से संबंधित सरकारी नीतियों में पारदर्शिता सुनश्चित करने के बारे में व्यापक दिशानिर्देश जारी किए थे।
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