Supreme Court: चंडीगढ़ महापौर चुनाव से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात
हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति हर्ष बंगर की खंडपीठ ने बुधवार को आप को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। आप ने मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।
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चंडीगढ़ महापौर चुनाव से जुड़े मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग वाली आम आदमी पार्टी के एक पार्षद की याचिका पर गौर करने को सहमत हो गया। याचिका में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने चंडीगढ़ के महापौर चुनाव फिर से कराने के पार्टी के आग्रह पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
महापौर पद के उम्मीदवार पार्षद कुलदीप कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने इस मामले का जिक्र प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के सामने किया। पीठ ने कहा कि हम इसे सूचीबद्ध करेंगे और इस पर गौर करेंगे।
हाईकोर्ट में क्या हुआ था?
इससे पहले हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति हर्ष बंगर की खंडपीठ ने बुधवार को आप को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। दरअसल, आप ने मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पार्टी ने कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा था।
क्या है मामला?
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चंडीगढ़ महापौर चुनाव में जीत हासिल करने के साथ तीन महत्वपूर्ण पद पर अपना कब्जा जमा लिया था। इस नतीजे से कांग्रेस-आप गठबंधन को करारा झटका लगा था। दोनों ने पीठासीन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।
हथकड़ी चुनाव चिह्न की मांग वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के लिए हथकड़ी चुनाव चिह्न दिए जाने की मांग वाली जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि यह नीतिगत मामला है। वह इस पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है। हम यह कैसे कर सकते हैं। हम उनसे हथकड़ी चुनाव चिह्न रखने के लिए नहीं कह सकते। आप इसे वापस लीजिए। इसके बाद वकील ने मामला वापस ले लिया। सुधीर नाम के व्यक्ति की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई थी।
यूपी बार काउंसिल को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील के रूप में नामांकन के लिए भारी फीस को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से जवाब मांगा। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने बार निकाय को नोटिस जारी किया और मामले को दो सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए पोस्ट किया।
शीर्ष अदालत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विधि संकाय के एक कानून स्नातक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया कि उसे एक दिन के भीतर अपने आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए नामांकन शुल्क 16,665 रुपये और अतिरिक्त 5,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इस पर पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उसके अनुसार कितनी फीस उचित होगी? तो कानून स्नातक ने जवाब दिया कि अधिवक्ता अधिनियम के अनुसार 750 रुपये का शुल्क लिया जाना चाहिए।
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छह महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी मामला; सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से पुनर्विचार की बात कही
अदालत ने स्वत: संज्ञान के बाद इस याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने साफ किया कि अगर हाईकोर्ट में फैसले पर दोबारा विचार होता है तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई आदेश पारित नहीं करेगी। शीर्ष अदालत ने 12 जनवरी को मध्य प्रदेश में छह महिला सिविल जजों की सेवाएं समाप्त करने के मामले का संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
उपभोक्ता फोरम में नियुक्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट- पूर्व न्यायाधीशों के लिए लिखित परीक्षा 'दूर की कौड़ी'
राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के इस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या पूर्व जिला न्यायाधीश को लिखित परीक्षा में शामिल होने के लिए कहना, उपभोक्ता संरक्षण नियमों के उद्देश्य को नाकाम करता है।
बता दें कि शीर्ष अदालत ने तीन मार्च, 2023 के एक फैसले में नियुक्ति के लिए दो पेपरों की लिखित परीक्षा में उम्मीदवारों के प्रदर्शन को आधार मानने की शर्त रखी थी। सु्प्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग करते हुए यह निर्देश दिया था।