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Supreme Court Updates: बिहार जाति सर्वेक्षण पर सितंबर में सुनवाई; जब वकील ने CJI से कहा- मैं आपको माफ करता हूं

Tue, 23 Jul 2024 08:40 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 23 Jul 2024 08:40 PM IST
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Supreme Court Updates Bihar Caste Census case Hearing in September Other Legal News in Hindi
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

सुप्रीम कोर्ट ने जाति सर्वेक्षण कराने के बिहार सरकार के फैसले को बरकरार रखने के पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई मंगलवार को सितंबर के लिए टाल दी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने पक्षों से इस मुद्दे पर लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा कि क्या राज्य को जाति सर्वेक्षण कराने का अधिकार है और किन शर्तों पर और किन परिस्थितियों में कानून के तहत ऐसा करना वर्जित है। पीठ ने बिहार सरकार के जाति सर्वेक्षण को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह से कहा कि उनकी दलीलें इस बात से संबंधित होनी चाहिए कि क्या राज्य की ओर से एकत्र किया गया संपूर्ण डाटा सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होना चाहिए। सिंह ने कहा कि उनकी चुनौती का मुख्य बिंदु यह है कि राज्य की ओर से किए गए सर्वेक्षण ने व्यक्तियों की गोपनीयता का उल्लंघन किया है क्योंकि लोगों को अपनी जाति का खुलासा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के 1992 के इंद्रा साहनी फैसले के तहत व्यक्तिगत जाति सर्वेक्षण पर रोक लगा दी गई है।

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जब वकील ने सीजेआई से कहा, मुझे अपमानित करने के लिए मैं आपको माफ करता हूं
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में नीट यूजी से जुड़ी सुनवाई में बाधा डालने के लिए वकील मैथ्यूज नेदुम्परा को फटकार लगाई। इस पर नेदुम्परा ने कहा, मुझे अपमानित करने के लिए मैं आपको माफ करता हूं। नेदुम्पारा ने याचिकाकर्ताओं के एक अन्य वकील नरेंद्र हुड्डा की दलीलों में बाधा डाल रहे थे। हुड्डा की दलील को बीच में रोकते हुए नेदुम्परा ने पीठ से कहा, मुझे कुछ कहना है। इस पर सीजेआई ने कहा कि हुड्डा की दलील पूरी होने के बाद बोलने का मौका दिया जाएगा। इस पर नेदुम्परा ने कहा, मैं यहां सबसे वरिष्ठ हूं।

'मैं वकीलों को इस अदालत में प्रक्रिया तय करने नहीं दे सकता'
नाराज सीजेआई ने नेदुम्परा से कहा, मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं। मैं कोर्ट का प्रभारी हूं। सुरक्षाकर्मियों को बुलाएं और उन्हें हटाएं। नेदुम्परा ने कहा, मैं खुद जा रहा हूं। सीजेआई ने कहा, आपको ऐसा कहने की जरूरत नहीं है। आप जा सकते हैं। मैंने पिछले 24 सालों से न्यायपालिका देखी है। मैं वकीलों को इस अदालत में प्रक्रिया तय करने नहीं दे सकता। इस पर नेदुम्परा ने बीच में रोकते हुए कहा, मैं 1979 से देख रहा हूं। सीजेआई ने उन्हें चेतावनी दी कि अगर नेदुम्परा ने अपना व्यवहार जारी रखा तो उन्हें निर्देश जारी करना पड़ सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी नेदुम्परा के आचरण की आलोचना करते हुए कहा, यह अवमाननापूर्ण है। हालांकि बाद में नेदुम्परा ने अपनी दलीलें रखी और यह भी कहा, मेरा अपमान करने के लिए मैं कोर्ट को माफ करता हूं। इससे पहले भी नेदुम्परा ने आमतौर पर विनम्र रहने वाले सीजेआई चंद्रचूड़ को क्रोधित किया है।
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जीएम सरसों की सशर्त रिहाई के लिए केंद्र की मंजूरी पर 'सुप्रीम' फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सरसों की फसल को पर्यावरण के लिए सशर्त रूप से जारी करने के लिए केंद्र के 2022 के फैसले की वैधता पर विभाजित फैसला सुनाया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सर्वसम्मति से निर्देश दिया कि केंद्र को देश में अनुसंधान, खेती, व्यापार और वाणिज्य के लिए जीएम फसलों के संबंध में एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने की आवश्यकता है। 18 अक्टूबर, 2022 को, जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) - पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ और सीसी) के तहत एक वैधानिक निकाय और देश में आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों का नियामक - ने पर्यावरणीय रिलीज की सिफारिश की। 25 अक्टूबर, 2022 को एक और निर्णय लिया गया जिसमें जीएम सरसों की एक किस्म ट्रांसजेनिक सरसों हाइब्रिड डीएमएच-11 को पर्यावरणीय रिलीज को मंजूरी दी गई। वहीं इस पर न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने दोनों निर्णयों की वैधता पर अलग-अलग राय दी और मामले को उचित पीठ द्वारा निर्णय के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
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