Supreme Court: डॉग बाइट से रेबीज की खबर का अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया; IIT में छात्र सुसाइड पर जांच तेज होगी
सुप्रीम कोर्ट ने एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर देश में कुत्तों के काटने और उससे होने वाली रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के मामलों पर सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया। मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इस खबर को बेहद चिंताजनक और परेशान करने वाला बताया। बेंच ने कहा कि इस खबर में कुछ बेहद चौंकाने वाले आंकड़े और तथ्य दिए गए हैं। हर दिन सैकड़ों डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे रेबीज फैल रहा है और खासकर बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में आ रहे हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह रिपोर्ट और आदेश मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भेजा जाए ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। कुत्ते के काटने से रेबीज और छह वर्षीय बच्ची की मौत की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया के दिल्ली संस्करण में छपी थी। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को दिया। इससे पहले विगत 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था, 'आप अपने घर में उन्हें खाना क्यों नहीं खिलाते? क्या हर गली और सड़क इन पशु प्रेमियों के लिए छोड़ दी जाए?' शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट के मार्च 2025 के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी। कोर्ट ने साफ किया था कि इंसानों के लिए भी जगह आवश्यक है। पशु कल्याण के नाम पर सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था नहीं फैलाई जा सकती।
आईआईटी खड़गपुर में छात्रों की आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जांच तेज करने के निर्देश
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए जांच तेजी से करने के निर्देश दिए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने आईआईटी खड़गपुर में एक चौथे वर्ष के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र की आत्महत्या पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संस्थान के वकील से पूछा, "आपके आईआईटी खड़गपुर में क्या गलत हो रहा है? छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? आपने इस मुद्दे पर विचार किया है?" संस्थान ने बताया कि उन्होंने 10 सदस्यीय समिति और 12 सदस्यीय काउंसलिंग सेंटर गठित किया है, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि मानसिक परेशानियों से जूझ रहे छात्र अक्सर अपनी समस्याएं उजागर नहीं करते।
अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद
शारदा यूनिवर्सिटी के मामले में, वरिष्ठ वकील और कोर्ट की सहायता कर रहीं अमिकस क्यूरी अपर्णा भट्ट ने बताया कि एक छात्रा की आत्महत्या के बाद एक सुसाइड नोट मिला जिसमें दो लोगों के नाम थे और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया है। एफआईआर छात्रा के पिता ने दर्ज कराई थी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि पिता को कैसे जानकारी मिली, क्या विश्वविद्यालय ने तुरंत पुलिस और परिवार को सूचना दी? सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाई थी। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर काम जारी है और प्रारंभिक रिपोर्ट आने में समय लगेगा। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
नई ओबीसी सूची मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर अदालत ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची को स्थगित कर दिया गया था। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान सुनाया।
मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देते हुए कहा कि इस मामले की आगे सुनवाई अगले सोमवार को की जाएगी। अब यह मामला अगले सोमवार को फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा, जिसमें यह तय होगा कि हाईकोर्ट का आदेश उचित था या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में नई ओबीसी सूची तैयार की थी, जिसमें कुछ नई जातियों को शामिल किया गया था और कुछ पुरानी श्रेणियों को संशोधित किया गया था। लेकिन इस सूची को लेकर राज्यपाल की मंजूरी और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसे रोक दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सूची बनाते वक्त तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यह संविधान के खिलाफ है। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
महाराष्ट्र: सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहित की गई किसानों की जमीन का मुआवजा बढ़ाया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र के उन किसानों को दी जाने वाली मुआवजे की राशि बढ़ा दी, जिनकी भूमि 1994 में राज्य में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए अधिग्रहीत की गई थी। प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ मुंबई हाईकोर्ट के अप्रैल 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसने किसानों की ओर से दायर अपील खारिज कर दी थी।
पीठ ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि अपीलकर्ताओं को दिया जाने वाला मुआवजा 32,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 58,320 रुपये प्रति एकड़ किया जाए। अदालत ने कहा कि किसानों की भूमि प्रमुख स्थान पर स्थित है और वे उच्चतम बिक्री दर का लाभ पाने के हकदार हैं।
पीठ ने कहा कि वह इस मामले को नए सिरे से विचार के लिए उच्च न्यायालय को भेज सकती थी, लेकिन अपीलकर्ता किसान थे और उनकी जमीन 1990 के दशक के आरंभ में प्रतिवादी-राज्य द्वारा अधिग्रहीत की गई थी, और उसके लिए यह निर्णय लेना उचित था कि क्या उन्हें उच्चतम आदर्श बिक्री विलेख के आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कानून की स्थापित स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि जब समान भूमि के संदर्भ में कई मूल्य हों, तो आमतौर पर सबसे उच्चतम मूल्य, जो एक वास्तविक लेनदेन है, पर विचार किया जाएगा। अपील करने वाले किसान महाराष्ट्र के परभणी जिले के पुंगाला गांव के निवासी बताए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के यूट्यूबर की याचिका पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूट्यूबर सावुक्कु शंकर की उस याचिका पर नोटिस जारी किया। जिसमें उन्होंने तमिलनाडु की 'अन्नाल आंबेडकर बिजनेस चैंपियंस स्कीम' (एएबीसीएस) में कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार करने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ को शंकर के वकील ने यह भी बताया कि सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका दायर करने के बाद उनके घर में तोड़फोड़ की गई। शंकर ने राज्य की एएबीसीएस और नमस्ते योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी का आरोप लगाया। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य अनुसूचित जाति के उद्यमियों और सफाई कर्मचारियों को लाभ पहुंचाना था।
याचिका में दावा किया गया कि इन योजनाओं को निजी संस्थाओं की सहायता से, अवैध सरकारी आउटसोर्सिंग और राजनीतिक हस्तक्षेप के माध्यम से अयोग्य लाभार्थियों द्वारा हथिया लिया गया है।उनके वकील ने कहा, चूंकि मैंने ये मुद्दे उठाए थे, इसलिये मेरे घर में तोड़फोड़ की गई। मैंने सीबीआई से निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन इससे इनकार कर दिया गया इसलिए मैंने उसे भी चुनौती दी है।
मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इस तरह के कदम से राज्य पुलिस की ओर से किए गए कामों पर असर पड़ सकता है। इसके बजाय अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जांच पूरी करके 12 सप्ताह के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करें।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर संगीतकार इलैयाराजा की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने अपने 500 से ज्यादा संगीत रचनाओं से जुड़ी कॉपीराइट केस को बॉम्बे हाईकोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की मांग की थी।