सुप्रीम कोर्ट अपडेट: जबरन रिटायर अफसर को अदालत से राहत, सम्मानजनक विदाई और 15 लाख भुगतान करने का फरमान
सुप्रीम कोर्ट ने संयुक्त सचिव पद पर पदोन्नति के महज दो महीने बाद डेडवुड यानी अनुपयोगी बताकर जबरन रिटायर किए गए भारतीय व्यापार सेवा के अधिकारी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने समयपूर्व सेवानिवृत्ति का आदेश रद्द करते हुए इसे मनमाना और दुर्भावनापूर्ण तरीके से शक्ति का इस्तेमाल करार दिया। केंद्र सरकार को अधिकारी को 15 लाख रुपये मुआवजा देने के साथ सभी सेवा लाभ देने और डीजीएफटी कार्यालय में बुलाकर पूरे सम्मान के साथ विदाई देने का आदेश दिया। 1989 बैच के अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड शानदार और बेदाग था। फरवरी 2018 में यूपीएससी की मंजूरी के बाद योग्यता के आधार पर उन्हें संयुक्त सचिव पद पर पदोन्नत किया गया। इसके महज दो महीने बाद 10 मई 2018 को तय से करीब पांच साल पहले मौलिक नियम 56(जे) के तहत उन्हें जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया। सरकार की समीक्षा समिति ने कुछ पुरानी गोपनीय टिप्पणियों के आधार पर उन्हें ‘डेडवुड’ बताया था।
मामले में की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने अपने फैसले में साफ कहा कि जिस अधिकारी को यूपीएससी की मंजूरी से महज दो महीने पहले ही योग्यता के आधार पर प्रमोट किया गया हो, उसे अचानक बिना किसी नए नकारात्मक साक्ष्य के 'निकम्मा' कैसे घोषित किया जा सकता है।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक तरफ विभाग अधिकारी को उच्च जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रमोट करता है और दूसरी तरफ महज दो महीने बाद उसे डेडवुड बताकर नौकरी से बाहर कर देता है। ये दोनों कदम एक-दूसरे के विरोधी हैं और साथ नहीं चल सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से साबित होता है कि अधिकारी के साथ दुर्भावनापूर्ण और मनमाने तरीके से शक्ति का दुरुपयोग किया गया है। कानून का गलत इस्तेमाल करके किसी अधिकारी को बिना ठोस आधार के जबरन रिटायर नहीं किया जा सकता।
एचपीवी वैक्सीनेशन पर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान पर चिंता जताने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि जब भी गलत टीकाकरण का मामला सामने आता है, तो मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे। बेंच ने पूछा, 'क्या आप इसे वापस लेना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि हम इस पर कोई टिप्पणी करें?' बेंच ने कहा, 'हमसे कड़ी टिप्पणी करने के लिए न कहें। अगर याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं, तो यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह हमारी लाखों बेटियों की सेहत का सवाल है। और आप इसे पटरी से उतारना चाहते हैं।'
सुप्रीम कोर्ट ने सालबोनी जमीन हड़पने के मामले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले हुई सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। उन्हें जांच में शामिल होने और जांच एजेंसी का सहयोग करने का निर्देश दिया था। रॉय ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका NGO ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ ने दाखिल की है। इसमें कहा गया कि कई प्लेटफॉर्म 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं, जबकि भारतीय कानून में 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति नाबालिग हैं। याचिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों से बिना माता-पिता की सहमति डिजिटल अनुबंध न करने, उम्र सत्यापन और पैरेंटल ई-केवाईसी जैसे सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शनों के दौरान 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, डीएमआरसी और अन्य से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक सुविधा को बंद करने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी आदेश जारी नहीं किया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे आम लोगों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए और दिल्ली में यातायात व्यवस्था भी बिगड़ गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि स्टेशनों को बंद करने का कानूनी आधार क्या था। कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
भारतीय तटरक्षक बल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह शॉर्ट सर्विस अपॉइंटी (एसएसए) अधिकारी प्रियंका त्यागी और इसी तरह की स्थिति वाली अन्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार करेगा। इसके लिए पहले उनकी विजिलेंस क्लियरेंस रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिपोर्ट मिलने के बाद दो हफ्ते के भीतर फैसला लेने को कहा है। त्यागी ने 14 साल से अधिक सेवा पूरी करने के बाद स्थायी कमीशन के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले कोस्ट गार्ड की नीति को अस्पष्ट और मनमाना बता चुका है।
निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए राष्ट्रीय नीति और वैधानिक ढांचा बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों और एनसीटीई समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। केरल की लिगिमोल जॉर्ज की याचिका में राष्ट्रीय निजी स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड बनाने तथा पेंशन, पीएफ, ग्रेच्युटी और शिकायत निवारण की समान व्यवस्था की मांग की गई है।