सुप्रीम कोर्ट अपडेट: 10 साल से पेंशन का इंतजार कर रहा चपरासी, सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक चपरासी को रिटायरमेंट के करीब 10 साल बाद भी पेंशन और अन्य रिटायरल बकाया नहीं मिलने पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के साथ गंभीर अन्याय हुआ है। याचिकाकर्ता 1984 में चपरासी के पद पर नियुक्त हुआ था और करीब 32 साल की सेवा के बाद 2016 में सेवानिवृत्त हुआ। उसकी सेवा पेंशन योग्य थी। इसके बावजूद बार-बार शिकायत और अनुरोध के बाद भी पेंशन जारी नहीं की गई। कोर्ट ने मुख्य सचिव से देरी, जिम्मेदार अधिकारियों और प्रस्तावित मुआवजे पर रिपोर्ट मांगी है।
जन्मतिथि बदलने के आरोप में रिटायर्ड प्रिंसिपल और पत्नी को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के एक रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल और उनकी पत्नी को अग्रिम जमानत दे दी है। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की गई थी। आरोप है कि प्रिंसिपल ने अपनी सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि 19 जून 1964 से बदलकर 19 जून 1965 कराई, जिससे उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख बदल गई और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाकर अवैध लाभ लिया गया। उनकी पत्नी स्कूल की गवर्निंग बॉडी की अध्यक्ष थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जांच में सहयोग की शर्त रखी थी।
झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामले में गुरुवार को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की एक याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस याचिका में, झारखंड सरकार और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। यह मामला सीनियर आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को उनके रिटायरमेंट से एक दिन पहले, 30 दिसंबर 2025 को राज्य का डीजीपी नियुक्त करने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट उन दूसरी याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा जिनमें आरोप है कि मिश्रा की डीजीपी (डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) के तौर पर नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के खिलाफ थी।