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SC Updates: मानहानि मामले में केजरीवाल को 'सुप्रीम' राहत; ईवीएम-वीवीपैट पर फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दायर

Mon, 13 May 2024 07:55 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Mon, 13 May 2024 07:55 PM IST
सार

Supreme Court Updates: सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि मामले में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक की मियाद को बढ़ाया है। उधर ईवीएम वीवीपैट मामले में याचिका दायर कर शीर्ष अदालत के 26 अप्रैल के फैसले की समीक्षा की मांग की गई है। 

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Supreme Court Update arvind kejriwal defamation case, Plea in SC seeks review of EVM VVPAT verdict
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि भाजपा आईटी सेल के खिलाफ वीडियो रिट्वीट करने के मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को राहत दी है। शीर्ष अदालत ने केजरीवाल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक की मियाद को बढ़ाया है। 

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ईवीएम-वीवीपैट पर फैसले की समीक्षा के लिए अदालत में याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर 26 अप्रैल के फैसले की समीक्षा करने की मांग की गई है। बता दें कि 26 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने ईवीएम-वीवीपैट को लेकर फैसला सुनाया था। फैसले में ईवीएम के वोटों की वीवीपैट पर्चियों से 100 फीसदी मिलान संबंधी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा था कि किसी भी प्रणाली पर आंख मूंदकर संदेह करना किसी भी व्यवस्था के प्रति शक पैदा कर सकता है। शीर्ष अदालत के फैसले पर समीक्षा की मांग करने वाली याचिका अरुण कुमार अग्रवाल ने दायर की है। अग्रवाल ने ही इस मामले में जनहित याचिका दायर की थी।  

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था
ईवीएम के वोटों की वीवीपैट पर्चियों से 100 फीसदी मिलान संबंधी याचिकाओं को खारिज करते हुए पीठ ने कहा था कि 'आंख मूंदकर किसी भी व्यवस्था पर संदेह करना उस व्यवस्था के प्रति शक पैदा कर सकता है। लोकतंत्र, सभी स्तंभों के बीच सद्भाव और विश्वास कायम रखने के बारे में है। विश्वास और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देकर हम अपने लोकतंत्र की आवाज को मजबूत कर सकते हैं।' 

अदालत ने दिए थे ये निर्देश
अदालत ने ये भी निर्देश दिया था कि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवारों की लिखित मांग पर जांच हो सकती है। चुनाव नतीजे घोषित होने के सात दिनों के भीतर यह मांग की जा सकती है। जांच की मांग करने वाले उम्मीदवार को ही इसकी लागत वहन करनी होगी और अगर ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप सही साबित हुआ तो चुनाव आयोग को उम्मीदवार को लागत के पैसे लौटाने होंगे।

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दो जिला न्यायाधीशों की याचिका पर हिमाचल उच्च न्यायालय को नोटिस 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दो जिला और सत्र न्यायाधीशों की याचिका पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश के चयन में उच्च न्यायालय कॉलेजियम ने उनकी योग्यता और वरिष्ठता पर विचार नहीं किया। अदालत में दोनों न्यायाधीशों की तरफ से वकील अरविंद दातार पेश हुए। न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने अरविंद दातार की दलीलों को सुना। वकील ने बताया कि दोनों ही सत्र न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए अनुशंसित किया गया था। शीर्ष अदालत में यह याचिका चिराग भानू सिंह और अरविंद मलहोत्रा द्वारा दायार की गई है। दोनों ही वर्तमान में बिलासपुर और सोलन में सत्र न्यायाधीश को तौर पर काम कर रहे हैं। दोनों ने अपनी याचिका में आरोप लगाए हैं कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश के लिए उनके नामों पर गौर नहीं किया गया। इस मामले में शीर्ष अदालत ने हिमाचल उच्च न्यायालय को नोटिस भेजा है। 

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