लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: आशीष मिश्रा को फिर मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर तक बढ़ाई अंतरिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कई मामलों में सुनवाई की। एक मामले में दिल्ली के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को कोर्ट ने झटका दिया है। वहीं, लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को राहत दी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को धार्मिक स्थलों पर 1991 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने केंद्र को अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। वहीं, एक मामले में दिल्ली के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को कोर्ट ने झटका दिया है। इसके अलावा, लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को फिर से राहत मिल गई है।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अभियोजन का सामना कर रहे केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष की अंतरिम जमानत मंगलवार को 26 सितंबर तक बढ़ा दी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि मामले में सुनवाई चल रही है और मामले को स्थगित कर दिया गया। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 24 अप्रैल को कहा था कि निचली अदालत को मामले में रोजाना सुनवाई करने का निर्देश देना संभव नहीं होगा क्योंकि इससे वहां लंबित अन्य मामले प्रभावित हो सकते हैं।
न्यायाधीशों के तबादले के लिए अनुमति की जरूरत नहीं: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने पहले के आदेशों में संशोधन करते हुए कहा कि सांसदों या विधायकों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए उसकी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं, जिनमें संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी शामिल है। शीर्ष अदालत ने अपने 10 अगस्त, 2021 और पिछले साल 10 अक्टूबर के आदेशों को संशोधित किया।
शीर्ष अदालत ने अपने अगस्त 2021 के आदेश में कहा था कि सांसदों या विधायकों के अभियोजन से जुड़ी विशेष अदालतों या सीबीआई अदालतों की अध्यक्षता करने वाले सभी न्यायिक अधिकारी अगले आदेश तक अपने वर्तमान पद पर बने रहेंगे। बाद में पिछले साल अक्तूबर में शीर्ष कोर्ट ने आदेश को संशोधित किया और निर्देश दिया था कि अब से हाईकोर्ट के लिए न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर उसकी पूर्व अनुमति लेना आवश्यक नहीं होगा। यह उन मामलों में लागू होगा, जहां स्थानांतरण किसी विशेष तैनाती में उनका कार्यकाल समाप्त होने पर सामान्य प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं।
दुष्कर्म पीड़िता के मांगलिक होने का पता लगाने संबंधी मामले का निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले का निपटारा कर दिया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रमुख को यह पता लगाने का आदेश दिया था कि कथित पीड़िता मांगलिक है या नहीं। कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। शीर्ष कोर्ट ने तीन जून एक विशेष सुनवाई की थी और मुद्दे का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट कर दिया था कि इस मामले को 26 जून को उच्च न्यायालय द्वारा गुण-दोष के आधार पर सुना जाएगा।
इससे पहले हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा करके लड़की से दुष्कर्म करने के आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका पर 23 मई को सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई की। पीठ को सूचित किया गया कि जमानत याचिका पहले ही खारिज कर दी गई है।
क्या है मामला?
दरअसल, व्यक्ति के वकील ने हाईकोर्ट के सामने दलील दी थी कि लड़की मांगलिक है, इसलिए दोनों के बीच शादी नहीं हो सकती, इसलिए उसे मना कर दिया गया। हालांकि, लड़की की ओर से पेश वकील ने दावा किया था कि उनकी मुवक्किल मांगलिक नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने ने 23 मई के अपने आदेश में कहा था कि लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रमुख को यह तय करने दें कि लड़की मांगलिक है या नहीं और संबंधित पक्ष आज से 10 दिन के भीतर लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष के समक्ष कुंडली पेश करें। विभागाध्यक्ष को निर्देश दिया जाता है कि वह तीन सप्ताह के भीतर इस न्यायालय को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।