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कश्मीर को विशेष दर्जा देने और 35A पर सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट, बनी 5 जजों की स्पेशल बेंच

Mon, 14 Aug 2017 02:56 PM IST
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान Updated Mon, 14 Aug 2017 02:56 PM IST
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Supreme court to hear on special status of Kashmir and Article 35A
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की विशेष दर्जा और अनुच्छेद 35A की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की एक बेंच का गठन किया है। अगले छह हफ्तों तक होने वाली सुनवाई में अनुच्छेद 35A के प्रावधानों पर आपत्तियों को सुना जाएगा। साथ ही पांच न्यायाधीशों की यह बेंच तय कर सकती है कि क्या वह संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है या नहीं।
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जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ ने सुनवाई के लिए आयी याचिका को पहले ही लंबित ऐसी ही एक अन्य याचिका के साथ संलग्न कर दिया जिस पर इस महीने के आखिर में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
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पीठ ने कहा, अगर इस मुद्दे पर पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से सुनवाई की आवश्यकता महसूस की गई तो तीन न्यायाधीशों वाली पीठ इसे उसके पास भेज सकती है। याचिका पर सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील ने कहा कि जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने 2002 में सुनाए गए अपने फैसले में अनुच्छेद 35ए के मुद्दे का ‘‘प्रथम दृष्टया निपटान’’ कर दिया था।
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पढ़ें: पीएम से मिलकर बोलीं महबूबा- 370 से हुई छेड़छाड़ तो J&K पर पड़ेगा बुरा असर

सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 35ए तथा जम्मू-कश्मीर संविधान की धारा छह को चुनौती देने वाली चारू वली खन्ना की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिका में संविधान के उन प्रावधानों को चुनौती दी गयी है जो राज्य के बाहर के व्यक्ति से शादी करने वाली महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित करता है। राज्य की इस तरह की महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित करने वाला प्रावधान उसके बेटे पर भी लागू होता है।

शुक्रवार को पीएम मोदी से मिलीं थीं सीएम मुफ्ती

Supreme court to hear on special status of Kashmir and Article 35A
पीएम मोदी से मिलीं सीएम मुफ्ती

वकील बिमल रॉय जाड के जरिये दायर की गयी याचिका में चारू ने कहा है कि अगर कोई महिला जम्मू-कश्मीर के बाहर के व्यक्ति से शादी करती है तो वह संपत्ति के अधिकार के साथ ही राज्य में रोजगार के अवसरों से भी वंचित हो जाती है।

जम्मू-कश्मीर के अस्थायी निवासी प्रमाणपत्र धारक लोकसभा चुनाव में तो मतदान कर सकते हैं परंतु वे राज्य के स्थानीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते।

पढ़ें: बीजेपी और RSS का एजेंडा J&K की संरचना को तोड़ना- फारुख अब्दुल्ला

​आपको बता दें कि एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में लगी अनुच्छेद 35ए को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जिसके बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मुफ्ती ने कहा कि अनुच्छेद 370 से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होगी। मुफ्ती ने कहा कि भारत का विचार जम्मू-कश्मीर के विचारों को समायोजित करता है। महबूबा ने कहा कि हममें से कोई धारा 370 के खिलाफ नहीं जाना चाहता। इसका पीएम मोदी ने खुद भरोसा दिया है।

मुफ्ती ने कहा कि 35ए पर चर्चा करने से जम्मू और कश्मीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से बातचीत हुई, स्थिति सामान्य है लेकिन J&K के लोगों को लगता है उनकी पहचान खतरे में है। मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का ताज है, यह बात लोगों को समझने जरूरी है। 
 इससे पहले गुरुवार को मुफ्ती ने इस मामले में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। 

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