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Supreme Court: 'ICG में महिलाओं को स्थायी कमीशन दें नहीं तो हम देंगे'; केंद्र को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

Mon, 26 Feb 2024 06:36 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 26 Feb 2024 06:36 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने तटरक्षक बल में कार्यरत एक महिला शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट अधिकारी को स्थायी कमीशन देने पर विचार करने से इन्कार पर केंद्र की आलोचना की। कहा, जब महिला अफसर सीमा संभाल सकती हैं, तो तटों की रक्षा क्यों नहीं कर सकतीं।

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Supreme Court  to Centre Ensure women get permanent commission in Indian Coast Guard or we will
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय तटरक्षक बल में महिला कोस्ट गार्ड अधिकारियों को स्थायी कमीशन के मामले में दायर एक याचिका पर सोमवार को 'सुप्रीम' सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि महिलाओं को ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि महिलाओं को भारतीय तटरक्षक बल में स्थायी कमीशन दिया जाए। पीठ ने कहा कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो अदालत ऐसा करेगी। 

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सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि तटरक्षक बल का काम सेना और नौसेना से अलग है। इसमें संरचनात्मक परिवर्तन किया जा रहा है। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) द्वारा एक बोर्ड स्थापित किया गया है।   
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जिसपर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि कार्यक्षमता आदि तर्क साल 2024 में मायने नहीं रखते। ऐसे महिलाओं को छोड़ा नहीं जा सकता। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ऐसा करेंगे। इसलिए स्थायी कमीशन को देखें। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि आपके बोर्ड में महिलाएं भी होनी चाहिए। फिलहाल अदालत ने मामले को सुनवाई  के लिए शुक्रवार को सूचीबद्ध किया है। 
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समय आ गया है कि तटरक्षक बल नीति बनाए
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता शॉर्ट सर्विस कमीशन की एकमात्र महिला अधिकारी हैं जिन्होंने स्थायी कमीशन का विकल्प चुना है। ऐसे में उनके मामले पर क्यों विचार नहीं किया जाना चाहिए? अब समय आ गया है कि तटरक्षक बल इस बारे में एक नीति के साथ सामने आए जो आधी आबादी के साथ निष्पक्ष हो।

शीर्ष अदालत भारतीय तटरक्षक अधिकारी प्रियंका त्यागी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बल की योग्य महिला शॉर्ट-सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की मांग की गई थी।

ICG में स्थायी कमीशन से इनकार पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
पिछली सुनवाई के दौरान,सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आप नारी शक्ति की बातें करते हैं, तो इस मामले में भारतीय तटरक्षक बल में महिला अफसर अपवाद क्यों हैं? शीर्ष अदालत ने तटरक्षक बल में कार्यरत एक महिला शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट अधिकारी को स्थायी कमीशन देने पर विचार करने से इन्कार पर केंद्र की आलोचना की। कहा, जब महिला अफसर सीमा संभाल सकती हैं, तो तटों की रक्षा क्यों नहीं कर सकतीं। अदालत ने कहा,  जब सेना और नौसेना महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दे रही है, तो तटरक्षक बल को अछूता नहीं रखा जा सकता। 

रिटायर्ड महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन देने के लिए बोर्ड गठित करे नेवी  
 सुप्रीम कोर्ट ने नौसेना को निर्देश दिया कि वह 2022 में रिटायर हो चुकी शॉट सर्विस कमीशन की एक महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन देने पर विचार करने के लिए एक बोर्ड का गठन करे। इस बोर्ड को 15 अप्रैल से पहले अधिकारी के मामले में फैसला लेने का निर्देश दिया गया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कोमोडर (रि.) सीमा चौधरी को याचिका पर यह निर्देश दिया। चौधरी का आरोप है कि नौसेना ने गलत तरीके से उन्हें स्थायी कमीशन देने से इन्कार कर दिया था।

चौधरी नौसेना में जज एडवोकेट जनरल डिपार्टमेंट में काम करती थीं जो नौसेना की विधिक शाखा है। वह 2007 में नौसेना में शामिल हुईं और 5 अगस्त 2022 को रिटायर हो गई थीं। पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सेवा के दौरान चौधरी को स्थायी कमीशन देने पर विचार करने के दौरान पूर्वाग्रह का कुछ अंश रहा है। इसे देखते हुए शीर्ष कोर्ट ने नौसेना से कहा कि वह एक चयन बोर्ड का गठन करे जो चौधरी को स्थायी कमीशन देने पर नए सिरे से विचार करे और इस प्रक्रिया में पहले के किसी भी न्यायिक या अर्धन्यायिक प्रक्रियाओं के दबाव में न आए। ऐसी कोई भी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट जो चौधरी को नहीं दी गई हो, बोर्ड को उसका भी संज्ञान नहीं लेने के लिए कहा गया है।
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