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अंतरिम आदेश से बहाल नहीं की जा सकती है पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 06 Nov 2020 03:34 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 06 Nov 2020 03:34 AM IST
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supreme court tells Uttarakhand government that fir can not be revived by interim order against journalists
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उत्तराखंड सरकार से कहा, नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से दो पत्रकारों के खिलाफ निरस्त की गई एफआईआर अंतरिम आदेश से बहाल नहीं की जा सकती हैं।

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हाईकोर्ट ने 27 अक्तूबर को दो पत्रकारों उमेश शर्मा और शिव प्रसाद सेमवाल के खिलाफ देहरादून में दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी थी। इन पत्रकारों के खिलाफ देशद्रोह, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों में इस साल जुलाई में ये एफआईआर दर्ज की गई थीं।
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जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा, हम अंतरिम आदेश के माध्यम से एफआईआर बहाल नहीं कर सकते।
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हालांकि, पीठ ने राज्य सरकार के इस कथन का संज्ञान लेते हुए एफआईआर रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दोनों पत्रकारों को नोटिस जारी किया। वहीं, रोहतगी का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। राज्य सरकार को मामले की जांच की इजाजत दी जानी चाहिए।

रोहतगी ने कहा, हम आश्वस्त करते हैं कि उमेश कुमार को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। पत्रकारों की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। इस मामले को मुख्यमंत्री द्वारा पहले दायर की गयी याचिका के साथ कर दिया गया है। इन दोनों मामलों मे अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

सीएम रावत के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश पर लगे रोक, याचिका पर नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश देने के खिलाफ दायर एक नई याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस याचिका में 27 अक्तूबर के नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है।


यह था मामला
 सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट को लेकर दोनों पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। फेसबुक पर की गई वीडियो पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि 2016 में एक व्यक्ति को झारखंड के गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनवाने में मदद के लिए झारखंड से अमृतेश चौहान नाम के एक व्यक्ति ने नोटबंदी के बाद हरेंद्र सिंह रावत और उनकी पत्नी सविता रावत के बैंक खाते में पैसे जमा कराए थे। हरेंद्र रावत उस समय झारखंड के भाजपा प्रभारी रहे एवं सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के कथित तौर पर रिश्तेदार बताए जाते हैं। सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरेंद्र ने देहरादून में उमेश शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें शर्मा पर उन्हें ब्लैकमेल किए जाने का आरोप लगाया गया था।

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