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वरिष्ठ अधिवक्ता : पदनाम के खिलाफ याचिका में CJI को प्रतिवादी बनाने पर 'सुप्रीम' आपत्ति, संशोधन का दिया निर्देश

Mon, 20 Mar 2023 04:54 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 20 Mar 2023 04:54 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि वह शीर्ष अदालत के लिए इस तरह के  दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं करेगी। पीठ ने कहा कि जिस समय शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने इस पर आपत्ति जताई थी, याचिकाकर्ताओं को तभी इसमें संशोधन करना चाहिए था।

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Supreme Court takes exception to making CJI party respondent in plea against senior advocate designation
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिये जाने को चुनौती देने वाली याचिका में भारत के प्रधान न्यायाधीश को पक्षकार बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। सोमवार को मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका दायर करने वाले वकील मैथ्यूज जे नेदुमपारा से पूछा कि कैसे उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को और उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों को पार्टी बना सकते हैं। न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने वकील कहा से कि  आप 40 साल के अनुभव वाले वकील हैं। आप प्रतिवादी संख्या दो (सीजेआई) और तीन (पूर्ण अदालत) को पार्टियों के रूप में कैसे शामिल कर सकते हैं?  इस दौरान अदालत ने उन्हें पार्टियों के मेमो में संशोधन करने का भी निर्देश दिया। 

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पीठ ने कहा कि वह शीर्ष अदालत के लिए इस तरह के  दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं करेगी। पीठ ने कहा कि जिस समय शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने इस पर आपत्ति जताई थी, याचिकाकर्ताओं को तभी इसमें संशोधन करना चाहिए था। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह देखते हुए कि शीर्ष अदालत को रजिस्ट्रार के माध्यम से एक पक्षकार के रूप में पक्षकार बनाया जा सकता है, उनसे पार्टियों के मेमो में संशोधन करने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि जरूरी संशोधन के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
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इस पर वकील नेदुमपारा ने इसके लिए एक दिन का समय भी मांगा। वहीं, पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर तीन न्यायाधीशों की पीठ का फैसला है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को अदालत को राजी करना होगा कि इस मुद्दे को बड़ी पीठ के पास क्यों भेजा जाना चाहिए।अन्यथा हम तीन न्यायाधीशों की पीठ से बंधे हैं। हमारे पक्ष में एक न्यायिक अनुशासन है। जब वकील ने कहा कि वह एक दिन के भीतर संशोधन करेंगे, तो पीठ ने कहा कि अगर ऐसा किया जाता है, तो याचिका को 24 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
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गौरतलब है कि इससे पहले याचिकाओं के एक अलग बैच की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था कि क्या उसके 2017 के फैसले में वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के रूप में नामित करने के लिए खुद के लिए और उच्च न्यायालयों के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने की आवश्यकता है।


कुछ दलीलों में कुछ हाई कोर्ट द्वारा पूर्ण न्यायालय के गुप्त मतदान की प्रक्रिया के माध्यम से अधिवक्ताओं को 'वरिष्ठ' पदनाम देने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को मनमाना और भेदभावपूर्ण घोषित करने की मांग की गई है।

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