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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस, दिव्यांग कैदियों की सुविधाओं पर मांगा जवाब

Tue, 11 Mar 2025 01:22 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 11 Mar 2025 01:22 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला / एएनआई
सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में दिव्यांग कैदियों के लिए उचित सुविधाओं की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता सत्यन नरवूर की याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। बता दें कि, याचिका में प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा और कार्यकर्ता स्टेन स्वामी जैसे मामलों का हवाला देते हुए, याचिका में दिव्यांग कैदियों की अनदेखी की ओर ध्यान दिलाया गया। इस याचिका में राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016 को जेलों में लागू करने की मांग की गई। इसके साथ जेल एक्ट में संशोधन कर दिव्यांग कैदियों की जरूरतों को शामिल करने का अनुरोध किया गया।
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प्रोफेसर साईबाबा और स्टेन स्वामी की हुई मौत
पूर्व दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेसर साईबाबा की 12 अक्तूबर 2023 को मृत्यु हो गई, उन्हें माओवादियों से संबंध के आरोप में 10 साल जेल में रखा गया था, लेकिन बाद में बरी कर दिया गया था। वहीं भीमा-कोरेगांव केस में गिरफ्तार स्टेन स्वामी की 2021 में मुंबई के हॉली फैमिली अस्पताल में मौत हो गई थी।  
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जेलों में क्या कमियां हैं?
2016 में कानून बनने के बाद भी अधिकतर राज्यों की जेल नियमावली में दिव्यांगों के लिए जरूरी प्रावधान नहीं जोड़े गए। जिसमें रैंप और विशेष शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से दिव्यांग कैदियों को दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह अधिकारों के उल्लंघन और कानून की अनदेखी का मामला है। यह याचिका दिव्यांग कैदियों के जीवन में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कानूनी शिक्षा में एआई-जनित सामग्री की समीक्षा की जरूरत: जस्टिस बीआर गवई
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बी आर गवई ने कानूनी शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर कहा कि कानूनी शिक्षा में एआई-जनित सामग्री की आलोचनात्मक समीक्षा की जरूरत है, ताकि उसकी सटीकता और कानूनी वैधता की जांच की जा सके। जस्टिस गवई 'कानून, तकनीकी और कानूनी शिक्षा' विषय पर नैरोबी विश्वविद्यालय में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा हमेशा नैतिक आचरण, ईमानदारी और पेशेवर जिम्मेदारी पर जोर देती है और इस पर एआई के प्रयोग के दौरान ध्यान दिया जाना चाहिए। 

अनियमितताओं के मामले में लोटस ग्रीन्स के खिलाफ कार्रवाई पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की रियल एस्टेट परियोजना में अनियमितताओं के मामले में बिल्डर लोटस ग्रीन्स के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। बिल्डर की तरफ से दायर याचिका पर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने यूपी सरकार और अन्य को नोटिस भी जारी किया। पीठ ने कहा कि मामले में कार्यवाही चलती रहेगी, लेकिन कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे। शीर्ष अदालत ने लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने डेवलपर की सेक्टर 150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के क्रियान्वयन में अनियमितता के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच का आदेश दिया था। अदालत ने सीबीआई को इस मामले में सांठगांठ वाले नोएडा प्राधिकरण के सभी अधिकारियों और परियोजना के आवंटन, विकास, मंजूरी में शामिल आवंटियों या बिल्डरों व इसमें शामिल किसी भी अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया था।
 
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