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SC: 'नियमितीकरण के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का नहीं हुआ पालन', जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों को 'सुप्रीम' फटकार
Mon, 10 Mar 2025 03:02 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 10 Mar 2025 03:02 PM IST
सार
Supreme Court: मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि राज्य प्रशासन ने 14 से 19 साल तक काम करने वाले मजदूरों के हक में आए फैसले को लागू करने के बजाय अस्पष्ट आदेश पास करके उन्हें परेशान किया।
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Supreme Court
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है क्योंकि उन्होंने 2007 के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने इसे जिद और अड़ियल रवैये का सीधा उदाहरण बताया है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि राज्य प्रशासन ने 14 से 19 साल तक काम करने वाले मजदूरों के हक में आए फैसले को लागू करने के बजाय अस्पष्ट आदेश पास करके उन्हें परेशान किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च को दिए आदेश में कहा, 'यह मामला राज्य अधिकारियों की तरफ से कानून की अवहेलना का एक 'पाठ्यपुस्तक उदाहरण' है। यह चौंकाने वाला और पहली नजर में अदालत की अवमानना जैसा है कि एक साधारण हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने में 16 साल लगा दिए गए।'
हाईकोर्ट के 25,000 रुपये का जुर्माना रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की तरफ से प्रशासन पर लगाए गए 25,000 रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को सख्ती से दंडित किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, 'हमें चिंता सिर्फ देरी की नहीं, बल्कि इस तथ्य की भी है कि गरीब दैनिक वेतनभोगियों को अधिकारियों ने बार-बार परेशान किया।'
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हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर 2024 में दिया था आदेश
अदालत ने कहा कि यह मामला नजीर है और इसमें दोषी अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। हालांकि, चूंकि हाईकोर्ट में अभी अवमानना की कार्यवाही जारी है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अतिरिक्त दंड नहीं दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वह हर हफ्ते सुनवाई करे ताकि कानून की गरिमा और सम्मान बना रहे। बता दें कि, एसआरओ 64 (1994) जम्मू-कश्मीर सरकार की तरफ से जारी एक आदेश है, जो राज्य सरकार के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नियम तय करता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च को दिए आदेश में कहा, 'यह मामला राज्य अधिकारियों की तरफ से कानून की अवहेलना का एक 'पाठ्यपुस्तक उदाहरण' है। यह चौंकाने वाला और पहली नजर में अदालत की अवमानना जैसा है कि एक साधारण हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने में 16 साल लगा दिए गए।'
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हाईकोर्ट के 25,000 रुपये का जुर्माना रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की तरफ से प्रशासन पर लगाए गए 25,000 रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को सख्ती से दंडित किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, 'हमें चिंता सिर्फ देरी की नहीं, बल्कि इस तथ्य की भी है कि गरीब दैनिक वेतनभोगियों को अधिकारियों ने बार-बार परेशान किया।'
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हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर 2024 में दिया था आदेश
- हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 16 अक्तूबर 2024 को अवमानना याचिका पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
- 4 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने प्रशासन को कोई राहत देने से इनकार कर दिया।
- जब प्रशासन के वकील ने बताया कि हाईकोर्ट ने अधिकारियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया था, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'अच्छा किया, सिंगल जज ने सही किया।'
अदालत ने कहा कि यह मामला नजीर है और इसमें दोषी अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। हालांकि, चूंकि हाईकोर्ट में अभी अवमानना की कार्यवाही जारी है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अतिरिक्त दंड नहीं दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वह हर हफ्ते सुनवाई करे ताकि कानून की गरिमा और सम्मान बना रहे। बता दें कि, एसआरओ 64 (1994) जम्मू-कश्मीर सरकार की तरफ से जारी एक आदेश है, जो राज्य सरकार के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नियम तय करता है।
- 2006 में ग्रामीण विकास विभाग के कुछ मजदूरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
- उन्होंने कहा कि वे 14 से 19 साल से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें SRO 64 के तहत नियमित नहीं किया गया।
- हाईकोर्ट ने 2007 में मजदूरों के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन प्रशासन ने 16 साल तक आदेश को लागू नहीं किया।