{"_id":"655cf00f84f5982fd70feddb","slug":"supreme-court-suggests-farmers-lighting-up-crop-residue-be-denied-msp-2023-11-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Stubble Burning: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रदूषण पर सख्ती करें, पराली जलाने वाले किसानों की एमएसपी रोकें","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Stubble Burning: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रदूषण पर सख्ती करें, पराली जलाने वाले किसानों की एमएसपी रोकें
Tue, 21 Nov 2023 11:29 PM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 21 Nov 2023 11:29 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने पंजाब को सलाह दी कि वह पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन देने के मामले में हरियाणा सरकार से सीख ले। मशीनरी वितरण के संबंध में पीठ ने राज्य और केंद्र से पूछा कि वे इसे सौ फीसदी मुफ्त क्यों नहीं करते।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोर्ट ने पराली जलाने से राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले प्रदूषण पर दिल्ली और पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने दोनों सरकारों से कहा, प्रदूषण रोकना आपका काम है। किसानों को खलनायक न बनाएं। शीर्ष कोर्ट ने किसानों को प्रोत्साहन देने का सुझाव देने के साथ ही पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने को भी कहा। पीठ ने कहा कि ऐसे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ न दें। अदालत ने सवाल किया, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को आर्थिक लाभ क्यों मिलना चाहिए?
पंजाब सरकार को पेश की हरियाण सरकार की मिसाल
जस्टिस संजयकिशन कौल व जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए उस प्रथा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया, जिसने दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को खराब कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए अदालत ने कहा कि पिछले छह वर्ष में यह नवंबर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। शीर्ष अदालत ने पंजाब को सलाह दी कि वह पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन देने के मामले में हरियाणा सरकार से सीख ले। मशीनरी वितरण के संबंध में पीठ ने राज्य और केंद्र से पूछा कि वे इसे सौ फीसदी मुफ्त क्यों नहीं करते। पीठ ने कहा, जलाने के लिए बस एक माचिस की तीली की जरूरत होती है। मशीन देने के साथ डीजल की लागत और मैनपावर पर भी सोचें।
अदालत ने पंजाब और यूपी के साथ-साथ दिल्ली सरकार से कहा, कारण पता है। समस्या वर्षों से ज्ञात है और नियंत्रित करना आपका काम है। जस्टिस धूलिया ने कहा, किसानों को अपनी समस्याएं रखने के लिए उचित मंच दिए बिना, उन्हें अपमानित किया जाता है। खलनायक बनाया जाता है। आखिर उनके पास पराली जाने के कुछ कारण होंगे। प्रश्न बहुत प्रासंगिक हैं कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? राज्य हमें यह जवाब देने में सक्षम नहीं है।
विज्ञापन
राजनीति भूलकर काम करें केंद्र और राज्य
केंद्र और राज्य सरकारों को इस मामले में राजनीति भूलकर यह पता लगाना चाहिए कि पराली जलाने पर कैसे अंकुश लगाया जाए। आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी रहा, तो जमीन सूख जाएगी, पानी गायब हो जाएगा।
सख्ती... पराली जलाने से बाज न आएं तो धान की खेती से रोकें
पीठ ने कहा कि जो किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे, उन्हें धान की फसल उगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि एनजीटी व शीर्ष कोर्ट के आदेश के बावजूद पंजाब में पराली जलाने पर रोक नहीं लग रही। यहां मंगलवार को भी 513 जगह पराली जलाई गई।
दिल्ली-एनसीआर की हवा बहुत खराब... एक्यूआई 372
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता बहुत खराब बनी हुई है। मंगलवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 372 दर्ज किया गया। गाजियाबाद का एक्यूआई 346, नोएडा का 330, ग्रेनो का 304, गुरुग्राम का 331, फरीदाबाद का 322 दर्ज किया गया।
विज्ञापन
पंजाब सरकार को पेश की हरियाण सरकार की मिसाल
जस्टिस संजयकिशन कौल व जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए उस प्रथा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया, जिसने दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को खराब कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए अदालत ने कहा कि पिछले छह वर्ष में यह नवंबर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। शीर्ष अदालत ने पंजाब को सलाह दी कि वह पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन देने के मामले में हरियाणा सरकार से सीख ले। मशीनरी वितरण के संबंध में पीठ ने राज्य और केंद्र से पूछा कि वे इसे सौ फीसदी मुफ्त क्यों नहीं करते। पीठ ने कहा, जलाने के लिए बस एक माचिस की तीली की जरूरत होती है। मशीन देने के साथ डीजल की लागत और मैनपावर पर भी सोचें।
विज्ञापन
अदालत ने पंजाब और यूपी के साथ-साथ दिल्ली सरकार से कहा, कारण पता है। समस्या वर्षों से ज्ञात है और नियंत्रित करना आपका काम है। जस्टिस धूलिया ने कहा, किसानों को अपनी समस्याएं रखने के लिए उचित मंच दिए बिना, उन्हें अपमानित किया जाता है। खलनायक बनाया जाता है। आखिर उनके पास पराली जाने के कुछ कारण होंगे। प्रश्न बहुत प्रासंगिक हैं कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? राज्य हमें यह जवाब देने में सक्षम नहीं है।
विज्ञापन
राजनीति भूलकर काम करें केंद्र और राज्य
केंद्र और राज्य सरकारों को इस मामले में राजनीति भूलकर यह पता लगाना चाहिए कि पराली जलाने पर कैसे अंकुश लगाया जाए। आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी रहा, तो जमीन सूख जाएगी, पानी गायब हो जाएगा।
सख्ती... पराली जलाने से बाज न आएं तो धान की खेती से रोकें
पीठ ने कहा कि जो किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे, उन्हें धान की फसल उगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि एनजीटी व शीर्ष कोर्ट के आदेश के बावजूद पंजाब में पराली जलाने पर रोक नहीं लग रही। यहां मंगलवार को भी 513 जगह पराली जलाई गई।
दिल्ली-एनसीआर की हवा बहुत खराब... एक्यूआई 372
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता बहुत खराब बनी हुई है। मंगलवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 372 दर्ज किया गया। गाजियाबाद का एक्यूआई 346, नोएडा का 330, ग्रेनो का 304, गुरुग्राम का 331, फरीदाबाद का 322 दर्ज किया गया।