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Supreme Court: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

Sun, 16 Oct 2022 12:28 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 16 Oct 2022 12:28 AM IST
सार

शीर्ष अदालत एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा ज्योतिष पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने का झूठा दावा किया था। मामला 2020 से शीर्ष कोर्ट में लंबित है।

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Supreme Court stops coronation of Swami Avimukteshwaranand Saraswati as Shankaracharya of Jyotish Peeth
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी है। जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा पीठ को सूचित करने के बाद आदेश पारित किया कि पुरी में गोवर्धन मठ के शंकराचार्य ने एक हलफनामा दायर किया है।

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हलफनामे में बताया गया कि अविमुक्तेश्वरानंद की ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में नियुक्ति का समर्थन नहीं किया गया है। पीठ ने कहा कि प्रार्थना खंड के संदर्भ में इस आवेदन की अनुमति है। शीर्ष अदालत एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा ज्योतिष पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने का झूठा दावा किया था। मामला 2020 से शीर्ष कोर्ट में लंबित है।
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याचिका में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने का एक जानबूझकर प्रयास किया गया है कि इस अदालत के समक्ष कार्यवाही को निष्फल बना दिया जाए और एक व्यक्ति को जो योग्य नहीं है और अपात्र है, वह अनधिकृत रूप से पद ग्रहण कर ले। इस तरह के प्रयासों को अदालत के अंतरिम आदेश से रोकने की जरूरत है और इसलिए इस आवेदन को स्वीकार किया जा सकता है और अनुमति दी जा सकती है।
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याचिका में कहा गया है कि सम्मान के साथ ऐसे दस्तावेज भी पेश किए गए हैं, जिसमें यह बताया गया है कि नए शंकराचार्य की नियुक्ति पूरी तरह से झूठी है, क्योंकि यह नियुक्ति की स्वीकृत प्रक्रिया का पूर्ण उल्लंघन है। ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने उत्तर में बद्रीकाश्रम ज्योतिष पीठ, पश्चिम में द्वारका के शारदा पीठ, पूर्व में पुरी में गोवर्धन पीठ और कर्नाटक के चिक्कमगलूर जिले में श्रृंगेरी शारदा पीठम में चार मठों की स्थापना की थी।

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