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सुप्रीम कोर्ट ने तमिल में NEET देने वालों को छूट देने से किया इनकार, बदला मद्रास हाईकोर्ट का फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Nov 2018 04:33 AM IST
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नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट(एनईईटी) में तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले छात्रों को 196 ग्रेस माक्र्स देने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने दरकिनार कर दिया है। करीब 24 हजार छात्रों 196 ग्रेस माक्र्स दिए गए थे। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि आमामी सत्र से प्रश्न पत्रों का दोहरा अनुवाद होना चाहिए।
यानी अंग्रेजी भाषा का अनुवाद क्षेत्रीय भाषा में हो और फिर क्षेत्रीय भाषा का अनुवाद अंग्रजी में हो। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा करने से प्रश्नों में विसंगतियां दूर हो सकती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अगर फिर भी विसंगतियां हो तो अंग्रेजी अनुवाद मान्य होगा। मालूम हो कि मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई पीठ ने सीपीएम नेता व राज्यसभा सदस्य टीके रंगराजन की याचिका पर नीट परीक्षा में तमिल भाषा के 49 गलत प्रश्नों के एवज में तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले सभी परीक्षार्थियों को 196 अंक देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट केइस फैसले को सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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यानी अंग्रेजी भाषा का अनुवाद क्षेत्रीय भाषा में हो और फिर क्षेत्रीय भाषा का अनुवाद अंग्रजी में हो। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा करने से प्रश्नों में विसंगतियां दूर हो सकती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अगर फिर भी विसंगतियां हो तो अंग्रेजी अनुवाद मान्य होगा। मालूम हो कि मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई पीठ ने सीपीएम नेता व राज्यसभा सदस्य टीके रंगराजन की याचिका पर नीट परीक्षा में तमिल भाषा के 49 गलत प्रश्नों के एवज में तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले सभी परीक्षार्थियों को 196 अंक देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट केइस फैसले को सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी तरह से अंग्रेजी में होती है। द्विभाषी प्रश्नपत्र वैसे छात्रों के लिए था जो अंग्रेजी के मुकाबले तमिल बेहतर समझते हो। प्रश्नपत्र बनाने वाले विशेषज्ञों को अंग्रेजी से तमिल अनुवाद करने में परेशानी हुई होगी लेकिन प्रश्नपत्र पर यह निर्देश था कि प्रश्नों में किसी तरह की स्पष्टता न होने पर अंग्रेजी अनुवाद को पढने की जरूरत है। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा सभी छात्रों को 196 ग्रेस माक्र्स देने का फैसला सही नहीं है।
वहीं सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले से इत्तफाक न रखते हुए कहा था कि इस तरीके से ग्रेस माक्र्स देने से मेधावी छात्रों का क्या होगा। यह अखिल भारतीय परीक्षा है। ग्रेस माक्र्स देने में इस पर विचार नहीं किया गया कि कुछ परीक्षार्थी ऐसे भी हो सकते थे जो प्रश्नों का तमिल में सही अनुवाद होने के बावजूद उनका गलत उत्तर दे सकते थे। पीठ ने यह भी कहा था कि हम समझते हैं कि अशुद्धियां थी लेकिन इस तरीके से ग्रेस माक्र्स देना गलत मार्ग में ले जाने की तरह है।
वहीं सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले से इत्तफाक न रखते हुए कहा था कि इस तरीके से ग्रेस माक्र्स देने से मेधावी छात्रों का क्या होगा। यह अखिल भारतीय परीक्षा है। ग्रेस माक्र्स देने में इस पर विचार नहीं किया गया कि कुछ परीक्षार्थी ऐसे भी हो सकते थे जो प्रश्नों का तमिल में सही अनुवाद होने के बावजूद उनका गलत उत्तर दे सकते थे। पीठ ने यह भी कहा था कि हम समझते हैं कि अशुद्धियां थी लेकिन इस तरीके से ग्रेस माक्र्स देना गलत मार्ग में ले जाने की तरह है।