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Supreme Court: 'पत्नी को क्यों रोका जाए? वो आरोपी नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
Fri, 08 Aug 2025 03:16 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 08 Aug 2025 03:16 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने एक दुष्कर्म मामले में आरोपी की पत्नी को भारत में रोकने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। आरोपी अमेरिका में नौकरी के लिए जाना चाहता था। हाईकोर्ट ने शर्त रखी थी कि उसकी पत्नी भारत में ही रहे। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को अनुचित ठहराते हुए कहा कि जब पत्नी आरोपी नहीं है, तो उसे क्यों रोका जाए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें बलात्कार के एक आरोपी की पत्नी को भारत में रहने के लिए मजबूर किया गया था। आरोपी अमेरिका में नौकरी के सिलसिले में जाना चाहता था, और हाईकोर्ट ने शर्त रखी थी कि उसकी पत्नी को भारत में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि जब पत्नी आरोपी नहीं है तो उसे क्यों रोका जाए?
हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने साफ कहा कि आरोपी की पत्नी ना तो इस मामले में आरोपी है और ना ही उसका इस केस से कोई लेना-देना है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने बिना उसे सुने विदेश यात्रा से रोका, जो कानून की प्रक्रिया का उल्लंघन है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस भी जारी किया है।
अमेरिका में काम कर रही पत्नी को रखा गया था ‘गिरवी’ जैसा
याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी दुबे ने दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ इस आशंका पर आधारित था कि अगर आरोपी विदेश गया तो वो वापस नहीं आएगा। इसलिए पत्नी को भारत में रोका गया, जैसे वो एक 'संपार्श्विक' हो। वकील ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक और अनुचित बताया।
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ये भी पढ़ें- 'शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करें या फिर देश से माफी मांगें', राहुल को चुनाव आयोग की दो टूक
पत्नी का केस से कोई लेना-देना नहीं- याचिका में दावा
याचिका में यह भी कहा गया कि पत्नी अमेरिका में कार्यरत है और उसका ना इस आपराधिक केस से संबंध है, ना ही वो किसी आरोप का सामना कर रही है। ऐसे में उसे भारत में रोकना मौलिक अधिकारों का हनन है। आरोपी ने कोर्ट में यह भी भरोसा दिलाया कि वह ट्रायल के लिए हर बार हाजिर रहेगा और दो लाख रुपए की जमानत भी देगा।
ये भी पढ़ें- मुंबई में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में 23 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार, पीड़िता की मां को दी थी धमकी
चार साल तक संबंध और शादी का झांसा, फिर केस दर्ज
आरोपी पर आरोप है कि उसने एक महिला से शादी का झांसा देकर चार साल तक संबंध बनाए। दोनों की मुलाकात एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर हुई थी। इसके बाद महिला की शिकायत पर राजस्थान के अजमेर स्थित क्रिश्चियनगंज थाने में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत केस दर्ज हुआ। ट्रायल कोर्ट ने विदेश जाने की अनुमति नहीं दी थी, जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अनुमति तो दी, लेकिन पत्नी को भारत में रुकने की शर्त रख दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने साफ कहा कि आरोपी की पत्नी ना तो इस मामले में आरोपी है और ना ही उसका इस केस से कोई लेना-देना है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने बिना उसे सुने विदेश यात्रा से रोका, जो कानून की प्रक्रिया का उल्लंघन है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस भी जारी किया है।
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अमेरिका में काम कर रही पत्नी को रखा गया था ‘गिरवी’ जैसा
याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी दुबे ने दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ इस आशंका पर आधारित था कि अगर आरोपी विदेश गया तो वो वापस नहीं आएगा। इसलिए पत्नी को भारत में रोका गया, जैसे वो एक 'संपार्श्विक' हो। वकील ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक और अनुचित बताया।
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पत्नी का केस से कोई लेना-देना नहीं- याचिका में दावा
याचिका में यह भी कहा गया कि पत्नी अमेरिका में कार्यरत है और उसका ना इस आपराधिक केस से संबंध है, ना ही वो किसी आरोप का सामना कर रही है। ऐसे में उसे भारत में रोकना मौलिक अधिकारों का हनन है। आरोपी ने कोर्ट में यह भी भरोसा दिलाया कि वह ट्रायल के लिए हर बार हाजिर रहेगा और दो लाख रुपए की जमानत भी देगा।
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चार साल तक संबंध और शादी का झांसा, फिर केस दर्ज
आरोपी पर आरोप है कि उसने एक महिला से शादी का झांसा देकर चार साल तक संबंध बनाए। दोनों की मुलाकात एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर हुई थी। इसके बाद महिला की शिकायत पर राजस्थान के अजमेर स्थित क्रिश्चियनगंज थाने में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत केस दर्ज हुआ। ट्रायल कोर्ट ने विदेश जाने की अनुमति नहीं दी थी, जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अनुमति तो दी, लेकिन पत्नी को भारत में रुकने की शर्त रख दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।