SC: इलाहाबाद HC की अवमानना के दो आरोपी रिहा, रिटायर्ड जजों को सुविधा मुहैया कराने के मामले में सरकार को राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच ने 4 अप्रैल को राज्य को एक नियम लागू करने का निर्देश दिया था। निर्देशों में कहा गया था कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को सुविधाएं प्रदान की जाएं, जिसमें रिटायर्ड न्यायाधीशों के लिए घरेलू सहायता का प्रावधान था।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई को 28 अप्रैल तक होल्ड कर दिया है।
यह है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक पीठ ने 4 अप्रैल को राज्य को एक निर्देश जारी किया था। निर्देश में कोर्ट ने कहा था कि रिटायर्ड न्यायाधीशों को सुविधाएं दी जाएंगी। कोर्ट के इसी आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त सचिव एस एम ए रिजवी और विशेष सचिव (वित्त) सरयू प्रसाद मिश्रा ने नहीं माना था। इस वजह से कोर्ट ने उन्हें अवमानना के आरोप में गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई
इलाहाबाद हाई कोर्ट के इसी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों अधिकारियों को रिहा करने के आदेश भी दिए हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नटराज ने बताया कि सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के संघ द्वारा दायर एक रिट याचिका में आदेश पारित किया गया था।
अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल थे। जस्टिस नरसिम्हा ने राज्य की अपील पर नोटिस जारी करके मामले को 28 अप्रैल के लिए पोस्ट कर दिया। जस्टिस ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक हाई कोर्ट द्वारा पारित 4 अप्रैल और 19 अप्रैल के आदेशों पर रोक रहेगी। जजों ने कहा कि हिरासत में लिए गए उत्तर प्रदेश सरकार के दोनों अधिकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही अदालत के रजिस्ट्रार को निर्देश देते हुए कहा कि वे तत्काल इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को फोन कर जानकारी दें और दोनों अधिकारियों को रिहा करने के लिए कहें।
कारण बताओ नोटिस किया था जारी
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच ने 4 अप्रैल को राज्य को एक नियम लागू करने का निर्देश दिया था। निर्देशों में कहा गया था कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को सुविधाएं प्रदान की जाएं, जिसमें सरकार को निर्देश दिया गया था कि रिटायर्ड न्यायाधीशों के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। हालांकि, 19 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य को रिटायर्ड जजों को सुविधा देने के मामले में विफल पाया था। इसके बाद कोर्ट ने मुख्य सचिव एस एम ए रिजवी और अतिरिक्त मुख्य सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा को अवमानना के वजह से कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे।
गुमराह करने का आरोप
एएसजी नटराज ने कोर्ट में कहा कि निर्देश वित्त से संबंधित था, इसलिए राज्यपाल की सहमति भी आवश्यक थी। राज्य सरकार ने इसी हफ्ते की शुरुआत में हाई कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें सूचित किया गया था कि निर्देशों के संबंध में कानून विभाग ने वित्त विभाग को एक प्रस्ताव भेजा था। हाईकोर्ट ने तथ्यों को दबाने और गुमराह करने के लिए राज्य पर आरोप लगाया है। हाई कोर्ट का कहना था कि हलफनामे में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के भत्तों की मांग के प्रस्ताव को मंजूरी न देने के कारणों का खुलासा नहीं किया गया था।