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फालतू याचिकाएं दायर करने पर सरकार को SC की फटकार, कहा- अपने गिरेबान में झांके

Sun, 29 Apr 2018 03:24 AM IST
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली 
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Sun, 29 Apr 2018 03:24 AM IST
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Supreme court slams central government over unwanted PIL

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर न्यायपालिका में सुधार की बात करने वाली सरकार को अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए। फालतू की याचिकाएं दायर करने के सरकार के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए यह टिप्पणी की है।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार अपनी खुद की राष्ट्रीय वाद नीति (नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी) पर पुनर्विचार करने में असफल रही है।  

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा है कि यह बहुत दुखद स्थिति है कि भारत सरकार फालतू या हल्की याचिकाएं दायर कर अदालतों पर बोझ डाली रही है, जिससे बचा जा सकता है।
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पीठ ने कहा, मूल सवाल यह है कि आखिरकार सरकार कब अपने रवैये में बदलाव करेगी। जस्टिस डिलिवरी सिस्टम के प्रति आखिर सरकार को अपने कर्तव्य और जिम्मेदारियों का अहसास कब होगा।  
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वास्तव में पीठ ने पाया कि सरकार ने एक अपील दायर की जबकि इसी तरह की अपील पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी और वह भी एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ।

Supreme court slams central government over unwanted PIL

पीठ ने कहा कि यह जानते हुए कि पूर्व में उसकी अपील खारिज हो चुकी है सरकार ने नए सिरे से अपील दायर की। पीठ ने कहा कि इससे भी दुखद बात यह है कि सरकार ने अपील वापस करने की बजाए मामले की पैरवी के लिए 10 वकीलों को रखा। इनमें एक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एक वरिष्ठ वकील भी थे।  

पीठ ने कहा 'उस अपील जिसके भविष्य में बारे में अनुमान सहज लगाया जा सकता है, उस अपील की पैरवी के लिए इतनी संख्या में वकीलों की सेवा ली गई। ऐसा कर सरकार अपनी जिम्मेदारी बढ़ा रही है और करदाताओं को इसका वहन करने के लिए कह रही है जबकि इस 'बला’ से बचा भी जा सकता है। क्या इस बारे में सोचा गया।’  

यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से भारत सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि एक न एक दिन भारत सरकार को यह बात जरूर समझ में आएगी कि अर्थपूर्ण और यथार्तपूर्ण नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी बनाई जाए। अगर इसका सही से क्रियान्वयन किया गया तो वादियों को बहुत फायदा होगा।  

पीठ ने पाया कि आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी, 2010 पर पुनीक्षण करने का निर्णय लिया गया था और नेशनल लिटिगेशन पॉलिशी, 2015 के संरूपण पर विचार किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि आठ वर्षों से इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। पीठ ने कहा कि पता नहीं यह काम कब पूरा होगा।

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