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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से अब्दुल्ला आजम को झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने के लिए कहा

Wed, 05 Apr 2023 07:53 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 05 Apr 2023 07:53 PM IST
सार

13 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने खान को धारा 353 सहित अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया था। उनपर दो हजार रुपए के जुर्माने के साथ दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। याचिका में खान ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के बाद उप्र विस सचिवालय ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि रामपुर जिले का स्वार विधानसभान क्षेत्र 13 फरवरी से खाली हो गया है।

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Supreme Court shocks Abdullah Azam, asks him to go to Allahabad High Court'
अब्दुल्ला आजम खान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान की परेशानी भी खत्म होते नहीं दिख रही हैं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल पुराने मामले में विधायक के निलंबन की याचिका को 10 अप्रैल तक टाल दिया है। खान ने सत्र कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरथना ने मामले में तीन सप्ताह में उत्तर प्रदेश से अपील का जवाब देने के लिए कहा था।

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अपराध के दौरान अब्दुल्ला नाबालिग

सुप्रीम कोर्ट में 29 मार्च को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा और सुमीर सोढ़ी को याचिका की एक कॉपी उत्तरप्रदेश सरकार को भेजने के लिए कहा था। साथ ही सुनवाई 5 अप्रैल तक टाल दी थी। 29 मार्च को तन्खा ने कहा था कि अपराध के समय खान किशोर अवस्था में था, इसलिए उसकी दोषसिद्धि पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के आदेश पर रोक नहीं लगाकर गलती की है।

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बता दें, 13 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने खान को धारा 353 सहित अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया था। उनपर दो हजार रुपए के जुर्माने के साथ दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। याचिका में खान ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के बाद उप्र विस सचिवालय ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि रामपुर जिले का स्वार विधानसभान क्षेत्र 13 फरवरी से खाली हो गया है।

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हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया

खान ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रामपुर के सामने अपील की और दोषसिद्धि पर रोक के लिए अर्जी भी दायर की थी, लेकिन 28 फरवरी को अदालत ने याचिका और आवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उसी दिन सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गया। लेकिन हाईकोर्ट ने 17 मार्च को राज्य सरकार को उनकी याचिका पर जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।

तन्खा ने कहा कि उनकी सजा कानूनी रूप से अस्थिर है, क्योंकि जब अपराध किया गया था तब वह नाबालिग थे। खान 1 जनवरी, 1993 में जन्मे थे। इसी हिसाब से घटना के दौरान में मात्र 15 वर्ष के थे। कार्रवाई में गलती हुई है। अब्दुल्ला आजम सहित सात लोगों के खिलाफ 2008 में एफआईआर दर्ज की गई थी।

यह है पूरा मामला

31 दिसंबर, 2007 को उत्तरप्रदेश के रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैंप पर हुए हमले के कारण 29 जनवरी 2008 को खान की कार को चेकिंग के लिए रोक दिया गया था। इसी के खिलाफ वे धरने पर बैठ गए थे। खान को धारा 353 सहित अन्य धाराओं के तहत 2 साल के जेल की सजा सुनाई थी। सातों अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया गया था। आपराधिक मामले में दोषी पाए जाने और दो साल या उससे अधिक के कारावास की सजा सुनाए जाने पर एक विधायक या सांसद अयोग्य हो जाता है।

 

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