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Supreme Court: कोर्ट ने रद्द की नाबालिग से दुष्कर्म-हत्या मामले में मौत की सजा, कहा- रोबोट जैसे काम न करें जज

Tue, 05 Sep 2023 07:05 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 05 Sep 2023 07:05 PM IST
सार

न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि पूरी जांच में बहुत गंभीर खामियां है। इतना ही नहीं फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट भी नहीं ली गई थी। पीठ ने कहा कि इतने गंभीर मामले में इतनी बड़ी गलती को मामूली कहते हुए मुझे दुख हो रहा है।

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Supreme Court sets aside death penalty to man, says Judge has to be fair, not act like robot
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में एक व्यक्ति की मौत की सजा रद्द कर दी है। साथ ही यह भी कहा कि एक न्यायाधीश को निष्पक्ष होना चाहिए। हालांकि इसका यह मतलब भी नहीं है कि वह अपनी आंखें बंद कर ले और रोबोट की तरह काम करे। इस दौरान शीर्ष अदालत ने पटना हाई कोर्ट की आलोचना भी की है। 

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जांच में कई गंभीर खामियां- शीर्ष कोर्ट
न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि पूरी जांच में बहुत गंभीर खामियां है। इतना ही नहीं फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट भी नहीं ली गई थी। पीठ ने कहा कि इतने गंभीर मामले में इतनी बड़ी गलती को मामूली कहते हुए मुझे दुख हो रहा है। जांच अधिकारी की ओर से इतनी गंभीर गलती के लिए कोई भी उचित स्पष्टीकरण पेश नहीं किया गया है। इतना ही नहीं जांच अधिकारी ने आरोपी का  किसी चिकित्सक से चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं कराया। 
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पटना हाईकोर्ट की आलोचना की
शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि यह हैरान करने वाला है कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट इस आधार पर आगे बढ़े कि वह व्यक्ति इसलिए दोषी था क्योंकि वह घटना के दिन पीड़िता के घर आया था और उसे अपने घर आ कर टीवी देखने का लालच दिया था। बस यह देखा गया कि पुलिस के सामने सभी गवाहों का मामला यह था कि यह एक अन्य किशोर आरोपी था जो पीड़िता के घर आया और उसे अपने साथ ले गया।
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शीर्ष अदालत की पीठ ने यह भी कहा कि न तो बचाव पक्ष के वकील, न ही सरकारी वकील, न ही ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी और दुर्भाग्य से उच्च न्यायालय ने भी मामले के इस पहलू पर गौर करना और सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करना उचित नहीं समझा। 


शीर्ष अदालत ने मौत की सजा के आदेश को रद्द करने के साथ ही जांच में गंभीर खामियों को देखते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए हाई कोर्ट में वापस भेज दिया।

ये है मामला
बता दें कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि याची (आरोपी) ने एक जून, 2015 को नाबालिग के साथ तब दुष्कर्म किया था जब वह कथित तौर पर उसके घर टेलीविजन देखने गई थी। इतना ही नहीं दुष्कर्म के बाद आरोपी ने उसका गला भी घोंट दिया था। ये मामला बिहार के भागलपुर जिले के एक गांव में साल 2015 में हुआ था। इस मामले में भागलपुर की ट्रायल कोर्ट ने 2017 में आरोपी को बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया था। साथ ही अपराध को दुर्लभतम श्रेणी में मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी। बाद में जब आरोपी पटना हाईकोर्ट पहुंचा तो हाई कोर्ट ने साल 2018 में दोषसिद्धि के खिलाफ दाखिल उसकी याचिका को खारिज कर दिया और मौत की सजा को बरकरार रखा। इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी। बाद में आरोपी ने सजा के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। 

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