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बच्चियों का खतना: उच्चतम न्यायालय ने याचिका संविधान पीठ को भेजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:29 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित बच्चियों के खतना की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पांच न्यायाधीशों वाली एक संविधान पीठ को भेजी है।
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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ दिल्ली के एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की नाबालिग बच्चियों का खतना किए जाने की प्रथा को चुनौती दी गयी है।
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याचिका में कहा गया, 'अवैध तरीके से (पांच साल से लेकर उनके किशोरी होने से पहले तक) की बच्चियों का खतना किया जाता है और यह बच्चों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र के समझौते, मानवाधिकारों की संयुक्त राष्ट्र सार्वभौमिक घोषणा के खिलाफ है। जिसमें भारत भी एक हस्ताक्षरकर्ता है।'
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साथ ही इसमें कहा गया कि इस प्रथा के चलते, 'बच्चियों के शरीर में स्थायी रूप से विकृति आ जाती है।'
दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के एक समूह ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि बच्चियों का खतना इस्लाम के कुछ संप्रदायों में किया जाता है। जिसमें दाऊदी बोहरा समुदाय भी शामिल है और अगर इसकी वैधता का आकलन किया जाता है तो उसे एक बड़ी संविधान पीठ से कराया जाना चाहिए।
{इनपुट- भाषा}