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सुप्रीम कोर्ट: दोषियों की पांच साल से लंबित अपील पर जमानत के लिए मानकों में नरमी संभव

Tue, 27 Jul 2021 03:38 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 27 Jul 2021 03:38 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऐसे दोषियों को जमानत देने के लिए मानक बनाने की संभावना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रजिस्ट्री और उत्तर प्रदेश सरकार से सुझाव मांगे, जिनकी सजा के खिलाफ अपीलों पर हाईकोर्ट में कोई सुनवाई नहीं हो पाई है और इस वजह से वह जेलों में हैं।

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Supreme Court seeks suggestion of UP government and Allahabad HC on dealing bail of convicts whose appeals are pending without hearing news in Hindi
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट जघन्य अपराधों में 18 दोषियों की आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रहा था। इन्होंने इस आधार पर जमानत की मांग की थी कि वह सात साल या इससे अधिक समय जेल में बिता चुके हैं क्योंकि सजा के खिलाफ उनकी अपीलों को हाईकोर्ट में अभी तक तक सामान्य सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। अदालत ने मामलों को तीन सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया और संकेत दिया कि इससे ऐसे मामलों के लिए दिशानिर्देश मिल सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार और इलाहाबाद हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से लंबे समय से जेल में रहे दोषियों को जमानत देने के लिए मानकों में नरमी लाने की संभावना पर सुझाव मांगे हैं। ये वे दोषी हैं, जिनकी अपील पांच साल से ज्यादा समय से हाईकोर्ट में बिना सुनवाई के लंबित है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह ऐसे मामलों से निपटने के लिए तीन हफ्ते बाद दिशा-निर्देश दे सकती है।
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शीर्ष अदालत गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए 18 आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर रही रही थी। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ इन अपीलों की इस आधार पर सुनवाई कर रही थी कि दोषियों ने सात साल या उससे ज्यादा समय जेल में बिताए हैं और उनकी सजा के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई हाईकोर्ट में अभी तक सूचीबद्ध नहीं की गई है। पीठ ने कहा, इस बारे में कुछ वक्त के लिए सोचा जा सकता है। जस्टिस गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की एक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा, अगर पांच साल तक हाईकोर्ट में दोषियाें की सजा के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए नहीं आती है तो आम तौर पर ऐसे मामलों में जमानत दी जा सकती है। 
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तीन हफ्तों में देना होगा सुझाव
पीठ ने दोषियों की अपीलों पर सुनवाई किए बिना यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद को ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से मशविरा करने और तीन हफ्तों में सुझाव देने को कहा है। वहीं, प्रसाद ने कहा, गंभीर और नृशंस मामलों में सुनवाई जल्द की जा सकती है। वकील विष्णु शंकर जैन ने भी कहा, सजा के खिलाफ अपीलों पर जल्द सुनवाई की जा सकती है। इस पर पीठ ने कहा, हम कैसे जल्द सुनवाई कर सकते हैं, जबकि बड़ी संख्या में अरसे से लंबित मामले हैं।


 

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