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जब देश अनलॉक हो रहा है तो मंदिर-मस्जिद क्यों नहीं खुलें, वर्चुअल दर्शन वास्तविक दर्शन नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Sat, 01 Aug 2020 06:03 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sat, 01 Aug 2020 06:03 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वर्चुअल दर्शन को वास्तविक दर्शन नहीं कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब देश अनलॉक के दौर से गुजर रहा है और धीरे-धीरे देश को खोला जा रहा है तो मंदिर-मस्जिद जैसे धार्मिक स्थलों को क्यों नहीं खोला जा सकता?
जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, जब देश धीरे-धीरे खुल रहा है तो सिर्फ धार्मिक स्थलों को ही क्यों बंद रहना चाहिए? पीठ ने कहा कि अगर लॉकडाउन की स्थिति होती तो बात कुछ और थी। मगर, जब सभी चीजें धीरे-धीरे खोली जा रही हैं तो खास दिनों पर मंदिर, मस्जिद, चर्च सहित अन्य धार्मिक स्थलों को भी खोला जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की उस याचिका पर दिया, जिसमें झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ और वासुकी नाथ मंदिर को खोलने की गुहार लगाई गई थी। ये मंदिर कोरोना महामारी के चलते एहतियातन बंद कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से कहा कि सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए दर्शन की इजाजत दी जा सकती है।
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जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, जब देश धीरे-धीरे खुल रहा है तो सिर्फ धार्मिक स्थलों को ही क्यों बंद रहना चाहिए? पीठ ने कहा कि अगर लॉकडाउन की स्थिति होती तो बात कुछ और थी। मगर, जब सभी चीजें धीरे-धीरे खोली जा रही हैं तो खास दिनों पर मंदिर, मस्जिद, चर्च सहित अन्य धार्मिक स्थलों को भी खोला जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की उस याचिका पर दिया, जिसमें झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ और वासुकी नाथ मंदिर को खोलने की गुहार लगाई गई थी। ये मंदिर कोरोना महामारी के चलते एहतियातन बंद कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से कहा कि सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए दर्शन की इजाजत दी जा सकती है।
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ई-टोकन जारी कर बच सकते हैं भीड़भाड़ से
शीर्ष कोर्ट ने झारखंड सरकार से यह भी कहा कि बाबा वैद्यनाथ मंदिर में दर्शन की ऐसी व्यवस्था की जा सकती है जिससे कि भीड़ न लगे और सीमित संख्या में लोग दर्शन कर सकें। पीठ ने यह भी कहा कि इसके लिए ई-टोकन भी जारी किया जा सकता है। दुबे ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें देवघर में होने वाले श्रावणी मेला के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के तीन जुलाई को पारित आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। पीठ ने हाईकोर्ट से मंदिरों को फिर से खोलने पर विचार करने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने कहा, 30 हजार पंडे मंदिर में हैं तो श्रद्धालुओं को प्रवेश क्यों नहीं
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता दुबे के वकील ने कहा, जब प्रशासन ने मंदिर के अंदर 30 हजार पंडों (पुजारियों) को रहने की इजाजत दी है तो श्रद्धालुओं को प्रवेश की मंजूरी क्यों नहीं दी जा रही है। झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा, मंदिर में मुश्किल से दर्जन भर पुजारी ही हैं।
कोरोना महामारी के चलते ये मंदिर बंद किए गए थे। जब महामारी बढ़ रही हो तो मंदिरों को खोले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। वहीं, झारखंड में गोड्डा से लोकसभा सांसद दुबे ने दलील दी है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सिर्फ कंटेनमेंट जाने वाले इलाकों में ही धार्मिक स्थलों को खोलने पर पाबंदी लगाई है। यहां तक कि 19वीं सदी में प्लेग और कालरा जैसी महामारी के दौरान भी मंदिर बंद नहीं किए गए थे।
शीर्ष कोर्ट ने झारखंड सरकार से यह भी कहा कि बाबा वैद्यनाथ मंदिर में दर्शन की ऐसी व्यवस्था की जा सकती है जिससे कि भीड़ न लगे और सीमित संख्या में लोग दर्शन कर सकें। पीठ ने यह भी कहा कि इसके लिए ई-टोकन भी जारी किया जा सकता है। दुबे ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें देवघर में होने वाले श्रावणी मेला के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के तीन जुलाई को पारित आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। पीठ ने हाईकोर्ट से मंदिरों को फिर से खोलने पर विचार करने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने कहा, 30 हजार पंडे मंदिर में हैं तो श्रद्धालुओं को प्रवेश क्यों नहीं
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता दुबे के वकील ने कहा, जब प्रशासन ने मंदिर के अंदर 30 हजार पंडों (पुजारियों) को रहने की इजाजत दी है तो श्रद्धालुओं को प्रवेश की मंजूरी क्यों नहीं दी जा रही है। झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा, मंदिर में मुश्किल से दर्जन भर पुजारी ही हैं।
कोरोना महामारी के चलते ये मंदिर बंद किए गए थे। जब महामारी बढ़ रही हो तो मंदिरों को खोले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। वहीं, झारखंड में गोड्डा से लोकसभा सांसद दुबे ने दलील दी है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सिर्फ कंटेनमेंट जाने वाले इलाकों में ही धार्मिक स्थलों को खोलने पर पाबंदी लगाई है। यहां तक कि 19वीं सदी में प्लेग और कालरा जैसी महामारी के दौरान भी मंदिर बंद नहीं किए गए थे।