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SC: सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला, कहा- तकनीकी खामी के आधार पर नहीं रोक सकते रेल दुर्घटना मुआवजा
Wed, 08 Oct 2025 10:02 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 08 Oct 2025 10:02 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल दुर्घटना से संबंधित मुआवजा मामले में अत्यधिक तकनीकी रवैया अपनाने से बचने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि महज तकनीकी गड़बड़ी या खामी के आधार पर मुआवजे के वैध दावे को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
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कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे दावा न्यायाधिकरण, भोपाल के एक आदेश को पलटते हुए यह अपने आदेश में यह बात कही। न्यायाधिकरण और हाईकोर्ट ने एक विधवा और उसके पुत्र के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया था। विधवा के पति की मौत एक रेल दुर्घटना में हो गई थी।
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जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा, रेलवे कानून की धारा 124ए के तहत तय प्रक्रिया, आपराधिक कानून से संबंधित प्रक्रिया नहीं है जो बिना संदेह के सबूत की मांग करती हो। कल्याणकारी कानून प्रबलता और संभावनाओं के सिद्धांत पर काम करते हैं।
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रेलवे कानून की धारा 124ए दुर्घटनाओं के मुआवजे से संबंधित है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि एक बार जब वैध टिकट रखने या जारी होने तथा ट्रेन से दुर्घटनावश गिरने के आधारभूत तथ्य विश्वसनीय सामग्री के माध्यम से स्थापित हो जाते हैं, तो वास्तविक यात्रा की वैधानिक धारणा दावेदार के पक्ष में लागू होनी चाहिए।
पीठ ने कहा, केवल तकनीकी अनियमितताओं या प्रक्रिया में खामियों के कारण रेलवे अधिनियम-1989, विशेष रूप से अध्याय 13, जो दुर्घटना के कारण यात्री की मृत्यु और चोट के लिए रेलवे प्रशासन के दायित्व से संबंधित है, जैसे कल्याणकारी अधिनियम के तहत किसी वैध दावे को नकारा नहीं जाना चाहिए। रेल दुर्घटनाओं के पीड़ितों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य को विफल करने वाले अति-तकनीकी दृष्टिकोण से बचा जाना चाहिए।