फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court says Sourness in a consensual relationship is not basis for a criminal case

Supreme Court: 'सहमति से बने रिश्ते में खटास आपराधिक मामले का आधार नहीं'; सुप्रीम कोर्ट ने की ये टिप्पणी

Tue, 27 May 2025 06:29 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 27 May 2025 06:29 AM IST
सार

पीठ ने कहा, शीर्ष अदालत ने बार-बार प्रावधानों के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी है। शादी करने के हर वादे के उल्लंघन को झूठा वादा मानना और दुष्कर्म के अपराध के लिए किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाना ‘मूर्खता’ करार दिया है।

विज्ञापन
Supreme Court says Sourness in a consensual relationship is not basis for a criminal case
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति से बने रिश्ते में खटास आना या पार्टनर का दूर होना आपराधिक तंत्र को लागू करने का आधार नहीं हो सकता। इस तरह का आचरण न सिर्फ अदालतों पर बोझ डालता है बल्कि आरोपी की पहचान को भी धूमिल करता है। शीर्ष अदालत ने जुलाई 2023 में महाराष्ट्र में एक व्यक्ति के खिलाफ शादी का झूठा आश्वासन देकर एक महिला से दुष्कर्म के आपराधिक मामले को खारिज कर दिया।

विज्ञापन


जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा, भले ही एफआईआर में लगाए गए आरोपों को सच मान लिया जाए, लेकिन रिकॉर्ड से ऐसा नहीं लगता कि शिकायतकर्ता की सहमति उसकी मर्जी के खिलाफ और सिर्फ शादी करने के आश्वासन पर ली गई थी। पीठ ने कहा, यह ऐसा मामला भी नहीं है, जिसमें शुरू में शादी करने का झूठा वादा किया गया हो। सहमति से बने रिश्ते में खटास आना या पार्टनर का दूर हो जाना राज्य की आपराधिक मशीनरी को लागू करने का आधार नहीं हो सकता।
विज्ञापन


प्रावधानों के दुरुपयोग पर बार-बार चेताया
पीठ ने कहा, शीर्ष अदालत ने बार-बार प्रावधानों के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी है। शादी करने के हर वादे के उल्लंघन को झूठा वादा मानना और दुष्कर्म के अपराध के लिए किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाना ‘मूर्खता’ करार दिया है। शीर्ष अदालत ने आरोपी की अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसने बॉम्बे हाईकोर्ट के जून 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सतारा में दुष्कर्म समेत अन्य अपराधों के लिए उसके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
दंपती को सलाह...साथ बैठकर खाना खाएं और मतभेद सुलझाएं
जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एक अन्य मामले में दंपती को साथ बैठकर खाना खाने और आपसी मतभेद को सुलझाने की सलाह दी। पीठ ने अंग्रेजी की कहावत का इस्तेमाल किया जिसका अर्थ है कि एक कप कॉफी पर बहुत सारी बातें हल हो सकती हैं। पीठ एक फैशन उद्यमी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने अपने तीन साल के बेटे के साथ विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। पीठ ने कहा, आपका तीन साल का बच्चा है। दोनों के बीच में ऐसा क्या गुरूर है। हमारी अदालत की कैंटीन में खाना हो सकता है बहुत अच्छा न हो। हम आप लोगों को एक और कमरा मुहैया कराएंगे। रात को साथ बैठिए खाना खाइये और मसले को आपस में सुलझा लीजिए। पीठ ने दंपती को पुरानी बातों को कड़वी दवा की तरह निगल लेने की सलाह दी और भविष्य के बारे में सोचने को कहा। इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।  

इसे भी पढ़ें- Weather: मुंबई में बारिश ने तोड़ा 107 साल का रिकॉर्ड, आठ राज्यों में अगले पांच दिनों तक आंधी- बारिश का अलर्ट  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed