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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वकीलों की दूसरी पंक्ति नहीं दिखती, जूनियर वकीलों को राह दिखाएं सीनियर

Tue, 31 May 2022 11:04 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 31 May 2022 11:04 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं कि कानूनी पेशे की युवा पीढ़ी को तैयार किया जाए और जब तक पुरानी पीढ़ी बूढ़ी हो जाए और पद छोड़ना चाहे, तब तक युवा पीढ़ी उनका स्थान लेने के लिए तैयार हो।

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Supreme Court says second line of lawyers missing in top court senior advocates must guide at least 15 juniors
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि यहां वकीलों की दूसरी पंक्ति गायब है और 20 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले हर वरिष्ठ अधिवक्ता को कम से कम 15 जूनियर वकीलों का मार्गदर्शन करना चाहिए। न्यायाधीश अजय रस्तोगी और बीवी नागरत्ना की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कनिष्ठ वकीलों को अदालती कला और शिष्टाचार में प्रशिक्षित करने के लिए कुछ तौर-तरीके तैयार कर सकते हैं।

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एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गई जिसमें पीठ ने कहा, 'वकीलों की दूसरी पंक्ति गायब है। हम चाहते हैं कि कानूनी पेशे की युवा पीढ़ी को तैयार किया जाए और जब तक पुरानी पीढ़ी बूढ़ी हो जाए और पद छोड़ना चाहे, तब तक युवा पीढ़ी उनका स्थान लेने के लिए तैयार हो। वर्तमान में इसमें एक अंतर है। प्रत्येक वरिष्ठ वकील, जिसे बार में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है, को कम से कम 15 कनिष्ठ वकीलों को प्रशिक्षित और मार्गदर्शन करने का कार्य करना चाहिए, जिनमें से कम से कम पांच तय मानक तक आएंगे।'
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न्यायाधीश रस्तोगी ने कहा कि इस अंतर को बहुत कम समय में पाटना होगा और युवा वकीलों को सिखाने के लिए कुछ तौर-तरीकों को तैयार करने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि व्यवस्था को उसी तरह से जारी रखना चाहिए जैसे वह चल रही है। यह देश की आखिरी अदालत है। चीजों को जल्द से जल्द व्यवस्थित करने की जरूरत है।
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अभिषेक मनु सिंघवी को भौतिक रूप से पेश होने को कहा गया था
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी से कहा था कि अदालत की छुट्टियों के दौरान कनिष्ठ वकीलों को अधिक अवसर दिए जाने चाहिए। अदालत ने सिंघवी को अपने मामले में जिरह करने के लिए डिजिटल रूप से पेश होने के बजाय भौतिक रूप से पेश होने के लिए कहा था।

सिंघवी ने मंगलवार को इस मामले में अदालत में कहा कि छुट्टियों के दौरान मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपस्थिति के संबंध में एक समान नियम होना चाहिए। पीठ ने कहा कि मुद्दा यह है कि वह नहीं चाहती कि किसी के साथ किसी तरह का अन्याय हो। इस दौरान अदालत में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अपने अनुभव को याद किया और कहा कि वे बार में अपने शुरुआती वर्षों के दौरान अदालत में इस तरह की व्यवस्था की लाभार्थी रही हैं।

उन्होंने कहा, 'जब मैं आई थी, केवल कनिष्ठों को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति दी गई थी। कनिष्ठ वकीलों को उपस्थित होने के लिए प्रोत्साहित किया गया था और उन्हें उपस्थित होना चाहिए। हालांकि, अगर उन्हें कोई कठिनाई आती है, तो पीठ उनके मामले को खारिज नहीं करे बल्कि उन्हें छुट्टी के बाद या सुनवाई की अगली तारीख पर तैयारी करके वापस आने का मौका देना चाहिए।'

अदालत ने कहा- हम किसी के साथ कोई भी अन्याय नहीं होने देंगे
पीठ ने कहा कि यह समस्या नहीं है क्योंकि वह किसी के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देगी। न्यायाधीश नागरत्ना ने सिंघवी और अरोड़ा दोनों को बताया कि भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) भी कनिष्ठ वकीलों के लिए छुट्टियों के दौरान अदालती कौशल और शिष्टाचार सहित वकालत के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान श्रृंखला आयोजित कर सकती है।


नागरत्ना ने कहा, आप सभी के पास इतना अनुभव है और आप इतने न्यायाधीशों के सामने पेश हुए हैं, आप सभी इस पेशे में आए युवाओं के लिए एक व्याख्यान श्रृंखला क्यों नहीं आयोजित कर सकते। वे इस तरह की श्रृंखला से काफी कुछ सीख सकते हैं।

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