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Forest Fire: 'कीमती जंगलों को आग के खतरों से बचाने की जरूरत; सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान की टिप्पणी

Fri, 17 May 2024 09:02 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 17 May 2024 09:02 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को जंगल की आग को रोकने और नियंत्रित करने के लिए धन के उपयोग, वन विभाग में रिक्तियों को भरने और अग्निशमन के लिए जरूरी उपकरण सहित विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी।

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Supreme Court says Precious forests should be saved from hazards of fire
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहुमूल्य वनों को आग के खतरों से बचाया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग को शीघ्र काबू में करने के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना की। साथ ही कहा कि राज्य में आग की घटनाओं के संबंध में दायर मुकदमा कोई प्रतिकूल मुकदमा नहीं है।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि हर किसी की रुचि केवल जंगलों की रक्षा में है। उत्तराखंड सरकार की ओर से पीठ के समक्ष पेश सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को जंगल की आग को रोकने और नियंत्रण करने के लिए फंड के उपयोग समेत उठाए गए अन्य कदमों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य वन विभाग में रिक्त पदों को भरने और आग बुझाने के लिए आवश्यक उपकरणों के वितरण संबंधी आंकड़े भी अदालत के सामने पेश किए। इस दौरान राज्य की प्रमुख सचिव राधा रतुड़ी और उप महाधिवक्ता जतिंदर कुमार सेठी भी शीर्ष अदालत में मौजूद थे।

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मेहता ने बताया कि अग्निशमन के लिए राज्य में 1,429 क्रू स्टेशनों की फील्ड टीमों को 40,184 विभिन्न उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने पीठ को एक ऐसी योजना के बारे में भी बताया जिसमें उन गांवों को प्रोत्साहन दिया जाता है जहां के जंगल में आग लगने की घटना नहीं होती है। शीर्ष अदालत वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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उपकरणों का अग्रिम वितरण होना चाहिए
मेहता की ओर से अग्निशमन के लिए उपलब्ध कराये जा रहे उपकरणों के बारे में बताए जाने पर पीठ ने कहा, आपने आंकड़े दिए हैं, लेकिन आपके वन रक्षकों की तस्वीरें और साक्षात्कार भी हैं। वे केले के पत्तों का उपयोग करके आग बुझा रहे हैं। यह एक तथ्य है जिसे कोई अस्वीकार नहीं कर सकता है। हमने तस्वीरों के साथ रिपोर्ट में जो पढ़ा है, हम उससे सवाल पूछ रहे हैं। मेहता ने कहा, मीडिया में जो कुछ भी छपा है, मैं उसे कमतर नहीं आंक रहा हूं, लेकिन कभी-कभी पूरी तरह से उन पर विश्वास करना थोड़ा खतरनाक हो सकता है। रिपोर्ट में दिखाई गई कुछ तस्वीरें कैलिफोर्निया के जंगल की आग की हैं। इस पर पीठ ने कहा, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसके तहत इन उपकरणों को पहले से वितरित किया जाना चाहिए। यदि वे स्टॉक में ही पड़े हैं, तो इसका क्या मतलब है।

मुख्य सचिव की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी
पीठ ने कहा, एसजी ने राज्य की मुख्य सचिव की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मुख्य सचिव अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को देख रही हैं। वे जंगल की आग से बचने और उन्हें जल्द से जल्द नियंत्रित करने के लिए एक स्थायी समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। हम राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना करते हैं।

कैंपा निधि का पूर्ण उपयोग हुआ
मेहता ने बताया कि कैंपा (प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) निधि का पूर्ण उपयोग हुआ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कैंपा ने 2023-24 के लिए जंगल में आग की रोकथाम और नियंत्रण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए 8.96 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इस निधि का पूर्ण उपयोग हो गया है। अदालत ने पिछली सुनवाई पर मुख्य सचिव से यह बताने को कहा था कि केंद्रीय एजेंसी से 9.12 करोड़ रुपये मंजूर हुए तो उसमें से सिर्फ 3.4 करोड़ रुपये का ही उपयोग क्यों हुआ।

एक साल में 1252 रिक्तियां हुईं
वन विभाग में खाली पदों के मुद्दे पर मेहता ने पीठ को ब ताया कि पिछले साल 1 जलाई तक कुल 1,709 फील्ड स्टाफ के पद खाली थे। पिछले एक साल के दौरान इनमें से 1,252 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। 1 मई को 942 पद रिक्त थे, जिसमें से 715 पद सीधी भर्ती वाले हैं। इनमें रेंज अधिकारी, वन रक्षक इत्यादि के पद हैं। इनकी भर्ती के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पास मांग प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित कर्मचारियों के अलावा मौजूदा सीजन में दैनिक मजदूरों को भी रखा गया है।

चीड़ की सुइयों के लिए 3 रुपये प्रति किलो
मेहता ने बताया कि चीड़ की सुइयों के संग्रह को बढ़ावा देने के लिए, स्थानीय संग्राहकों को 3 रुपये प्रति किलोग्राम प्रदान किया जा रहा है। राज्य ने एनटीपीसी के साथ एक समझौता किया है जहां चीड़ की सुइयों की आपूर्ति की जाती है और ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। वन कर्मियों को चुनाव ड्यूटी में लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वन विभाग के फील्ड अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी पर इसलिए लगाया गया था, क्योंकि संबंधित जिलों में सरकारी कर्मचारियों की कमी थी।

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