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नाराजगी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र डिजिटल इंडिया रटता रहता है, मगर जमीनी हालात से भी वाकिफ रहें

Tue, 01 Jun 2021 04:35 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Jun 2021 04:35 AM IST
सार

  • केंद्र की टीका नीति से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- डिजिटल इंडिया रटते रहते हैं, मगर ग्रामीण इलाकों में हालात एकदम अलग
  • टीका खरीद की नीति, कीमताें में अंतर और कोविन एप पर पंजीयन अनिवार्य किए जाने के मुद्दे केंद्र को लगाई कड़ी फटकार

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Supreme Court says Policy makers aware of the ground situation to know What is really happening around
कोरोना टीकाकरण (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल असमानता को रेखांकित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोरोना के टीके की खरीद की नीति, टीके की कीमताें में अंतर और टीकाकरण के लिए कोविन एप पर पंजीयन अनिवार्य किए जाने के मुद्दे केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने तल्ख लहजे में कहा, नीति निर्माताओं को जमीनी हालात से वाकिफ होना चाहिए और उसी के मुताबिक नीतियां बनानी चाहिए।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने कोरोना प्रबंधन से संबंधित स्वत: संज्ञान लिए गए मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र से कहा, आप डिजिटल इंडिया डिजिटल इंडिया रटते रहते हो, मगर ग्रामीण इलाकों में हालात एकदम अलग हैं। झारखंड का एक निरक्षर मजदूर राजस्थान में कैसे रजिस्ट्रेशन कराएगा? पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, आप हमें बताओ कि डिजिटल से वंचित आबादी की चुनौती से कैसे पार पाओगे? आपको पता होना चाहिए कि आसपास असल में क्या घट रहा है? यह भी देखें कि देशभर में क्या हो रहा है? अगर हमें करना होता तो हम 15-20 दिन पहले कर चुके होते।
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पीठ ने कहा, आपकी नीति सही नहीं है। कोरोना महामारी की अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए आपकी नीति में लचीलापन होना चाहिए। देश में बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है और न ही इंटरनेट है ऐसे में वह वैक्सीन का स्लॉट पाने से वंचित हो रहे हैं। जवाब में मेहता ने कहा, पंजीकरण अनिवार्य है क्योंकि एक व्यक्ति को दूसरी खुराक के लिए पता लगाने की आवश्यकता है और जहां तक ग्रामीण इलाकों की बात है, वहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यक्ति टीकाकरण के लिए पंजीकृत करा सकता है। इस पर पीठ ने मेहता से सवाल किया कि क्या सरकार को लगता है कि यह प्रक्रिया व्यावहारिक है। पीठ ने कहा, हम नीति दस्तावेज देखना चाहते हैं। आप नीति दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लेकर आएं।
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टीका खरीद: वैश्विक निविदा निकाल रहे दिल्ली-पंजाब, क्या यही आपकी नीति
पीठ ने केंद्र सरकार से वैक्सीन की खरीद नीति के बारे में जानना चाहा। पीठ ने सवाल किया कि पंजाब और दिल्ली जैसे राज्य और यहां तक कि बीएमसी भी कोविड-19  के विदेशी टीके खरीदने के लिए वैश्विक निविदा जारी करने की प्रक्रिया में हैं। पीठ ने सवाल किया, क्या यह केंद्र सरकार की नीति है कि राज्य या नगर निगम वैक्सीन खरीद सकती है या केंद्र सरकार उनके लिए नोडल एजेंसी की तरह खरीद करने जा रही है? हम इस पर स्पष्टता चाहते हैं और इस नीति के पीछे का तर्क जानना चाहते हैं।

अलग-अलग कीमतें: आखिर यह दोहरी नीति क्यों
पीठ ने एक बार फिर केंद्र व राज्यों के लिए टीकों की अलग-अलग कीमतों को लेकर सवाल उठाया। केंद्र कहता है कि ज्यादा मात्रा में टीका खरीदने पर उसे काम दाम चुकाने पड़ रहे हैं। अगर आपका यही तर्क है तो राज्यों को टीके के ज्यादा दाम क्यों देने पड़ रहे हैं? कोर्ट ने कहा, आखिर यह दोहरी नीति क्यों है। देशभर में टीके के दाम एक जैसे रखे जाने की जरूरत है।

केंद्र ने कहा, साल के आखिर तक 18 से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पीठ को बताया कि  2021 के अंत तक 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण कर लिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, इसके अलावा सरकार फाइजर जैसी कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है और अगर बातचीत सफल रहती है तो टीकाकरण पूरा करने की समय-सीमा बदल जाएगी।

जब केंद्र अड़ा तो दी नसीहत: गलती हुई तो स्वीकारने में संकोच न करें
टीकाकरण नीति पर मेहता ने कहा, यह नीतिगत मसला है और न्यायालय के पास न्यायिक समीक्षा का अधिकार सीमित है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम नीति नहीं बना रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि आप केंद्र सरकार हैं और आप जानते हैं कि क्या सही है और क्या गलत? इन बातों के लिए हमारे पास मजबूत हाथ हैं। आप रवैया लचीला रखें। हम नीति नहीं बना रहे हैं। हमारा कहना है कि आप जमीनी हकीकत को समझें। पीठ ने कहा, अगर किसी से गलती हो गई तो उसे स्वीकार करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

विदेश मंत्री जयशंकर की तारीफ भी की
सुनवाई के आखिर में पीठ ने महामारी की चुनौतियों से निपटने के लिए की जा रही कोशिशों को लेकर केंद्र और विदेश मंत्री एस जयशंकर की तारीफ की। पीठ ने कहा, किसी की आलोचना या खिंचाई करने का कोई मकसद नहीं है। विदेश मंत्री जब अमेरिका गए और बातचीत की तो यह हालात की अहमियत को दिखाता है। इस सुनवाई का मकसद यही है कि दूसरी आवाजों को भी सुना जाए। हम ऐसा कुछ भी नहीं कहेंगे जो राष्ट्र के कल्याण में बाधक हो।


समस्या है तो आप गौर करें
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 'अगर हम कह रहे हैं कि समस्या है तो हम उम्मीद करते हैं कि आप इस पर गौर करेंगे। डिजिटल साक्षरता अभी दूर की कौड़ी है। मैं खुद सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी का चेयरमैन हूं। मैंने इन समस्याओं को देखा है। आपको लचीला होना ही होगा।'

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