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चैनल प्रतिनिधियों की यूपी विस में हाजिरी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 Mar 2016 11:24 PM IST
सार
- उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई।
- चैनल ने यह स्वीकार किया गया कि उनसे गलती हुई है
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सुप्रीम कोर्ट
विस्तार
मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ फर्जी स्टिंग ऑपरेशन चलाने वाले एक निजी चैनल के पत्रकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
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शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा कि यह विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। शीर्ष अदालत ने कहा कि देश का अपना कानून है, विधानसभा कानून नहीं।
न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल गौरव भाटिया ने विधानसभा की इस कार्रवाई को सही ठहराने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन पीठ उन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ।
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भाटिया ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एक स्टिंग में वरिष्ठ नेता (आजम खान)के बारे में गलत बात बताई गई। यह बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि विधानसभा ने इसके लिए कमेटी का गठन किया।
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चैनल ने यह स्वीकार किया गया कि उनसे गलती हुई है। चैनल से उस स्टिंग ऑपरेशन की रॉ फुटेज मांगी गई लेकिन उन्होंने असली रॉ फुटेज नहीं दी। कमेटी के सामने नौ लोगों ने बयान दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि चैनल ने इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड से छेड़छाड़ की।
जवाब में पीठ ने कहा कि तो क्या आप उन्हें जेल भेज देंगे। पीठ ने कहा कि आप यह बताइए कि यह विधानसभा के विशेषाधिकार का उल्लंघन कैसे हैं। जवाब में भाटिया ने कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता एसपी मौर्या ने आजम खान के मसले को उठाया था। उन्होंने कहा कि चैनल ने जो किया वह विधानसभा केविशेषाधिकार के तहत हुआ।
पीठ ने कहा कि आए दिन अखबारों में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की खबर होती तो क्या यह विशेषाधिकार का उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि विधानसभा के बाहर हुई घटनाओं पर क्या विधानसभा कार्यवाही कर सकती है।
क्या विधानसभा को उस पर संज्ञान लेने का अधिकार है। पीठ ने कहा कि इस मामले में विधानसभा कैसे कार्रवाई कर सकती है। देश में कानून है और आप कानून नहीं है। पीठ ने साफ कहा कि बाहर हुई घटनाओं पर विधानसभा को कोई अधिकार नहीं है।
जवाब में भाटिया ने कहा कि चैनल केलोगों ने कमेटी को गुमराह करने की कोशिश की। विधानसभा ने उन लोगों को समन किया है, जिसमें नेचुरल जस्टिस का कोई उल्लंघन नहीं है। पीठ ने कहा कि आखिरकार विधानसभा किसी को दोषी कैसे ठहरा सकता है।
यह विधानसभा के अधिकारक्षेत्र के बाहर है। जवाब में भटिया ने कहा कि विधानसभा को विशेषाधिकार की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार है। हालांकि पीठ ने राज्य सरकार की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ।
जिसके बाद भाटिया ने कहा कि वह जवाब दाखिल करना चाहते हैं। पीठ ने सरकार को चार हफ्ते का वक्त दे दिया लेकिन चैनल के पत्रकारों के खिलाफ विधानसभा की कार्यवाही पर रोक लगा दी।